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Pakistan की स्थिति और खस्ता, बिना बिजली अंधेरे में गुजर रही कराची और लाहौर में रातें

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Pakistan: पड़ोसी देश पाकिस्तान के हालात और अधिक खराब हो गए हैं। पाकिस्तान की हालत ये है कि अधिकांश शहरों में रातें बिना बिजली के गुजर रही हैं। पाकिस्तान के प्रमुख शहर कराची और लाहौर में रात अंधेरे में कट रही है। गरीबी में वृद्धि को जमीनी वास्तविकताओं के अनुरूप बताते हुए विश्व बैंक ने भी पाकिस्तान में राजकोषीय स्थिति अस्थिर, कम मानव विकास, अति-विनियमित निजी क्षेत्र, कृषि और ऊर्जा क्षेत्रों में पाकिस्तान की हालात खराब बताई है।

पिछले वित्त वर्ष 2022 में गरीबी बढ़कर 39.4 फीसद हो गई

दुनिया के प्रमुख मंचों पर कश्मीर का राग अलापने वाले पाकिस्तान की आर्थिक हालत सुधरने का नाम नहीं ले रही। विश्व बैंक ने कहा कि पाकिस्तान में पिछले वित्त वर्ष 2022 में गरीबी बढ़कर 39.4 फीसद हो गई है। खराब आर्थिक स्थिति के कारण 12.5 करोड़ रुपए और लोग इसके जाल में फंस गए हैं। जानकारी के मुताबिक वाशिंगटन स्थित बैंक ने मसौदा नीति नोट जारी किया है। जिसे उसने नए चुनाव से पहले पाकिस्तान की अगली सरकार के लिए सभी हितधारकों की मदद से तैयार किया।

विश्व बैंक के मुताबिक, पाकिस्तान में गरीबी एक साल के भीतर 34.2 फीसद से बढ़कर 39.4 फीसदी हो गई है। जिसमें 12.5 मिलियन से अधिक लोग 3.65 डॉलर प्रति दिन आय स्तर की गरीबी रेखा से नीचे आ गए हैं। इस नोट में कहा है कि करीब 9.5 करोड़ पाकिस्तानी गरीबी रेखा के नीचे जी रहे हैं।

पाकिस्तान के लिए विश्व बैंक के अर्थशास्त्री टोबियास हक ने कहा है कि वहां आर्थिक मॉडल अब गरीबी को कम नहीं कर रहा है। जीवन स्तर समकक्ष देशों की तुलना में काफी नीचे गिरा है। वैश्विक ऋणदाता ने पाकिस्तान से कृषि और अचल संपत्ति पर कर लगाने के लिए कदम उठाने और अर्थव्यवस्था के 7 फीसद से अधिक के राजकोषीय समायोजन के माध्यम से आर्थिक स्थिरता प्राप्त करने के प्रयास में व्यर्थ खर्चे में कटौती करने का आग्रह किया।

अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में विश्व बैंक का सुझाव

गरीबी में वृद्धि को जमीनी वास्तविकताओं के अनुरूप बताते हुए विश्व बैंक ने मानव विकास, अस्थिर राजकोषीय स्थिति, अति-विनियमित निजी क्षेत्र, कृषि के अलावा ऊर्जा क्षेत्रों को अगली सरकार के लिए सुधारों, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में पहचाना है। कर-जीडीपी अनुपात में तत्काल पांच फीसद वृद्धि और व्यय में जीडीपी के करीब 2.5 फीसद कटौती का प्रस्ताव किया है। जिसका उद्देश्य अस्थिर अर्थव्यवस्था को विवेकपूर्ण राजकोषीय रास्ते पर लाना है। सरकारी राजस्व को मजबूत करने पर लोनदाता के नोट में कर छूट को वापस लेने और रियल एस्टेट, कृषि क्षेत्रों पर करों का बोझ बढ़ाने के माध्यम से राजस्व-जीडीपी अनुपात में 5 फीसद तक सुधार करने के लिए कई उपाय बताए हैं।

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