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अडानी-अम्बानी किसके यार?

आर्टिकल/इंटरव्यूअडानी-अम्बानी किसके यार?

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अमित बिश्नोई
प्रधानमंत्री मोदी ने तेलंगाना की एक चुनावी जनसभा में ये कहा कि अडानी और अम्बानी टेम्पो में भर भरकर काला धन कांग्रेस पार्टी को पहुंचा रहे है , एकबारगी इस खबर को सुनकर, सुनकर नहीं बल्कि वीडियो देखकर दिमाग़ में पहला रिएक्शन यही आया कि इस चुनावी माहौल में जब फ़र्ज़ी वीडियोज़ का दौर चल रहा है, AI के इस दौर में ये भी कोई फ़र्ज़ी वीडियो होगा। सिर्फ मैं ही नहीं बाद में पता चला बहुत से ऐसे लोग जो थोड़ा राजनीती में दिलचस्पी रखते हैं और लिखते पढ़ते रहते हैं उन्हें भी पहली नज़र में इस पर यकीन नहीं हुआ और मेरी तरह सभी ने भाजपा के आधिकारिक एक्स हैंडल पर जाकर कन्फर्म किया तब जाकर यकीन हुआ कि मोदी जी ने वाकई ऐसा कहा है कि अडानी और अम्बानी अब कांग्रेस के साथी बन गए हैं। प्रधानमंत्री ने इस चुनाव में अबतक ऐसी बहुत सी बातें कहीं जिन्हे अनाप शनाप कहा जा सकता है और उन बातों का मज़ाक भी उड़ाया गया लेकिन किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि प्रधानमंत्री मोदी अपने मित्रों का रिश्ता अब कांग्रेस से जोड़ देंगे।

प्रधानमंत्री पिछले 10 बरसों से अडानी और अम्बानी का नाम लेने से कतराते रहे हैं, कांग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी के संसद और संसद के बाहर अनगिनत हमलों के बावजूद प्रधानमंत्री ने कभी भी सार्वजानिक रूप से या सार्वजानिक मंचों पर अडानी और अम्बानी का नाम नहीं लिया। आपको याद होगा कि हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद शेयर बाजार और देश की राजनीती में एक तूफ़ान उठा था, संसद में इस रिपोर्ट को लेकर अडानी और प्रधानमंत्री मोदी संबंधों पर राहुल गाँधी संसद में बहुत आक्रमक थे, यहाँ तक कि उनके भाषण को सदन की कार्रवाई से हटा दिया गया, तब भी प्रधानमंत्री ने अडानी और अम्बानी का नाम नहीं लिया लेकिन अचानक एक चुनावी मीटिंग में अपने मुंह से पहली बार अडानी और अम्बानी का नाम लेकर उन्होंने सबको चौका दिया। प्रधानमंत्री ने सिर्फ नाम नहीं लिया बल्कि अडानी और अम्बानी के बारे में जो कुछ कहा, सबसे ज़्यादा हैरानी उस बात कि हुई. प्रधानमंत्री मोदी ने बड़े स्पष्ट रूप से अपने भाषण में राहुल गाँधी का नाम लिए बिना कहा कि कांग्रेस के शहज़ादे पहले सुबह उठते ही अडानी और अम्बानी की माला जपते थे लेकिन जब से चुनाव की घोषणा हुई है , कांग्रेस के शहज़ादे ने अडानी और अम्बानी को गालियां देनी बंद कर दी हैं, क्या बात हुई, गालियां देनी क्यों बंद कर दीं. इसके आगे प्रधानमंत्री ने जो कहा उसने तो पूरे उद्योग जगत में हलचल मचा दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अम्बानी और अडानी से माल उठा रही है, अडानी और अम्बानी बोरों में भरभरकर काला धन कांग्रेस को पहुंचा रहे हैं.

प्रधानमंत्री के इस भाषण के बाद तो कांग्रेस पार्टी को बैठे बिठाये हमलावर होने का एक सुनहरा मौका मिल गया और कल से ही इस मुद्दे पर उसके हमले जारी हैं। राहुल गाँधी ने सवाल भी पूछा कि प्रधानमंत्री मोदी को कैसे मालूम हुआ कि अम्बानी और अडानी काले धन की सप्लाई टेम्पो से करते हैं, क्या ये उनका निजी तजुर्बा है. कांग्रेस ने आज अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट भी डाली है जिसमें बताया जा रहा है अडानी टेम्पो सर्विस काले धन को इधर से उधर करती है. खैर कांग्रेस पार्टी को तो मोदी जी ने मौका दिया ही है लेकिन देश के लाखों लोगों के ज़हन में ये सवाल तो आया ही है कि क्या अम्बानी और अडानी वाकई में कांग्रेस पार्टी की मदद कर रहे हैं, क्या दुनिया के सबसे दौलतमंद उद्योगपतियों में शुमार अडानी और अम्बानी का मोदी जी से मोह भंग हो गया है, क्या उन्हें ये लगने लगा है कि मोदी सरकार का तीसरी बार सत्ता में आना मुश्किल है और इसलिए वो पहले से ही अपने लिए ज़मीन बना रहे हैं. आज के दिन देश का बच्चा बच्चा भी शायद इस बात की जानकारी रखता होगा कि अम्बानी और अडानी मोदी जी के उन मित्रों में शामिल हैं जिनके लिए प्रधानमंत्री मोदी कुछ भी करने को तैयार रहते हैं, भले पूरा विपक्ष खिलाफ क्यों न हो, चाहे कितने ही सवाल क्यों न उठते हों , चाहे कितनी ही विपरीत रिपोर्टें आती रहें मगर मोदी जी उनपर कोई आंच नहीं आने देंगे। लेकिन उन्ही मित्रों के बारे में ऐसी बाते?

क्या अडानी और अम्बानी का ये लेवल है कि वो काले धन की सप्लाई टेम्पो से करते हैं, और फिर प्रधानमंत्री को इस बात की जब जानकारी है कि उनके इन दोनों मित्रों ने काला धन कांग्रेस पार्टी को दिया है तो वो उनपर कार्रवाई क्यों नहीं करते। देश का वो प्रधानमंत्री जिसने भ्रष्टाचार को जड़ से ख़त्म करने की कसम खाई है जो काले धन पर ED की कार्रवाइयों का ज़ोरदार ढंग से समर्थन करता है, जो कहता है न खाऊंगा और न खाने दूंगा, जो झारखण्ड में नोटों की बरामदगी पर कांग्रेस पार्टी को घेरता है वो सार्वजानिक मंच से ये आरोप लगा रहा है कि देश के दो सबसे बड़े उद्योग पति जिनका शुमार उनके अभिन्न मित्रों में होता है, वो कांग्रेस पार्टी को चुनाव में पैसा पहुंचा रहे हैं. यहाँ से एक सवाल ये भी उठता है कि आखिर अडानी और अम्बानी कांग्रेस पार्टी की मदद क्यों कर रहे हैं. आम तौर एक बिजनेस मैन हमेशा सरकार के साथ ही रहता है, वो सरकार से कभी पन्गा नहीं लेता क्योंकि उसे बिजनेस चलाना होता है. पिछले दस बरस में पूरे देश ने देखा कि गौतम अडानी कहाँ से कहाँ पहुंच चुके हैं, एक समय देश के टॉप 20 में भी उनका नाम नहीं था लेकिन मोदी काल में ही एक समय वो दुनिया के नंबर दो पोजीशन पर विराजमान हो गए, ये तो हिंडेनबर्ग रिपोर्ट न आयी होती तो आज भी शायद वो वहां विराजमान होते। मोदी जी के इस बयान के बाद उद्योग जगत भी परेशान है, उसकी समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर अम्बानी और अडानी किसके यार हैं? मोदी जी के या फिर कांग्रेस के. समझ में तो मुझे भी कुछ नहीं आ रहा है, मोदी जी 2024 में 2047 का विजन रखते हैं , हो सकता है इसमें भी उनको कुछ दूर का दिख रहा हो.

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