Gujarat Chunavi Dangal – गुजरात मे इस साल के अंत मे विधानसभा चुनाव होने को हैं। सभी राजनीतिक दलों ने जनता को लुभाने के लिए अपनी कमर कस ली है और मैदान में उतर चुके हैं। वही गुजरात की राजनीति का सबसे बड़ा पैमाना यहाँ की।जातिय राजनीति है। गुजरात मे यूपी बिहार की तरह धमाकेदार जाति के परिदृश्य पर राजनीति होती है। राजनीति दल विधानसभा क्षेत्र में मौजूद जाति के आधार पर प्रत्याशी उतारते हैं और जनता को लुभाने के लिए उनके सामने उनके बीच का प्रत्याशी मैदान में खड़ा करते हैं।
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वैसे तो गुजरात मे सभी की नजरें पाटीदार समाज और आदिवासी समाज पर रहती है। लेकिन यहाँ के अगर हम कोली समाज की बात करे तो यह गुजरात की 40 से 45 सींटो पर अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। लेकिन यह समाज आर्थिक रूप से काफी कमजोर है जिसके चलते गुजरात की राजनीति में पाटीदार समाज के सामने इसका अस्तित्व नहीं दिखाई देता है। लेकिन राजनेता कोली समाज को अपने खेमे में करने के लिए हर सम्भव प्रयास कर रहे हैं।
इस बार के चुनाव में कोली समाज:-
हर साल कोली समाज भले ही राजनीति में सक्रिय भूमिका नहीं निभाता हो लेकिन इस बार राजनीति में कोली समाज सक्रिय दिख रहा है। कोली क्रांति सेना राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। लेकिन समाज के कई लोग ऐसे हैं जो कोली समाज को राजनीति से दूर रखना चाह रहे हैं। परंतु इस बार कोली समाज राजनीति में अपनी धाक जमाने को तैयार है और राजनीतिक दलों को अपना महत्व समझाने की कवायद में लगे हैं।
कोली समाज 45 सींटो पर निर्णायक मतदाता की भूमिका निभाता है। लेकिन राजनीति दल इसपर अपना ध्यान नहीं केंद्रित कर रहे हैं। लेकिन कोली समाज इस बार अपने महत्व को समझाने की कोशिश कर रही है। हालांकि कोली समाज की साक्षरता दर कम है और वह गरीबी को झेल रहे हैं। गुजरात मे समाज कई छोटी छोटी उपजातियों में विभक्त है जिसका फायदा राजनीतिक दलों को हो रहा है और राजनीतिक दल इन उपजातियों को एक नहीं होने देना चाहते। वर्ष 2017 में राजनीतिक दलों ने कोली समाज के 15 प्रत्याशी मैदान में उतारे थे।

