New Parliament Building देश के नए संसद भवन का आज उद्धाटन हो चुका है। लेकिन इसको लेकर अभी तक राजनीति जारी है। नए संसद भवन के उद्धाटन को लेकर जहां चारों ओर उत्साह है। वहीं दूसरी ओर इस मौके पर राष्टीय जनता दल ने एक विवादित ट्वीट किया है। राजद ने एक ताबूत की तस्वीर शेयर की और इसकी तुलना नए संसद भवन से कर डाली है।
नए संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम पर राजनीति अब भी जारी है। इसको लेकर राष्ट्रीय जनता दल ने ट्विटर पर एक विवादास्पद फोटो पोस्ट की। राजद ने ट्वीट में एक ताबूत की फोटो के साथ नए संसद भवन की तुलना करके लिखा कि ये क्या है? बता दें कि राजद का ट्वीट ऐसे समय में आया, जब पीएम मोदी ने नए संसद भवन का उद्घाटन किया। संसद के नए भवन के उद्घाटन पर अब विपक्ष द्वारा खूब राजनीति की जा रही है। कांग्रेस सहित 20 विपक्षी दलों ने संसद के नए भवन के उद्घाटन कार्यक्रम का बहिष्कार पहले ही कर दिया था। राजद भी इस बहिष्कार वाली टीम में शामिल हो गया था।
राजद के ट्वीट पर भाजपा का पलटवार
राजद के ट्वीट की चारों ओर अब अलोचना हो रही है। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने राजद के ट्वीट पर पलटवार करते हुए कहा कि ‘आज ऐतिहासिक दिन है और इससे देश गौरवान्वित हो रहा है। आप नजरबट्टू के अलावा और कुछ नहीं हैं। अपनी छाती पीटते रहिए। 2024 में देश की जनता इसी ताबूत में बंद कर देगी। नए लोकतंत्र के मंदिर में आपको आने का मौका भी नहीं देगी। चलिए यह तय हुआ कि संसद देश की और ताबूत आपका।’
पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी बोले कार्रवाई को वहीं चलेगी
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि भले विपक्ष दलों ने संसद के नए भवन उद्घाटन कार्यक्रम का बहिष्कार किया है लेकिन सदन की कार्यवाही तो यहीं चलनी है। क्या राष्ट्रीय जनता दल तय किया है कि वो नए संसद भवन का स्थायी रूप से बहिष्कार करेंगे? वे लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं। ताबूत का चित्र दिखाना अपमानजनक के अलावा और कुछ नहीं। सुशील मोदी ने कहा, जिन लोगों ने नए भवन की तुलना ताबूत से की। ऐसे लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज हो
मामला बढ़ता देख राजद की सफाई
राजद के ट्वीट पर जब विवाद बढ़ने लगा तो राजद ने इस मामले में अपनी सफाई दी है। राजद नेता शक्ति सिंह यादव ने इस मामले में कहा कि भाजपा सरकार ने लोकतंत्र को दफन कर दिया है। इसलिए हमारे ट्वीट में ताबूत प्रतीकात्मक तौर दिखाया है। देश की जनता इसे स्वीकार नहीं करेगा। संसद, लोकतंत्र का मंदिर है। यह ऐसी जगह है, जहां पर देश के हर मसले पर चर्चा होती है।

