ITR New Rules इनकम टैक्स विभाग के नोटिस का जवाब नहीं देने पर परेशानी बढ़ सकती है। आयकरदाताओं के लिए इनकम टैक्स विभाग ने नए निर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के निर्देश पर आयकर विभाग ने देश में GST चोरी, टैक्स चोरी, फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन मामलों को रोकने के लिए छापेमारी अभियान शुरू चलाया हुआ है।
इनकम टैक्स विभाग ने ‘जांच’ के दायरे में आने वाले मामलों के बारे में दिशा-निर्देश जारी किए। इसके तहत ऐसे आयकरदाताओं (Taxpayers) जिन्होंने इनकम टैक्स विभाग के भेजे नोटिस का जवाब नहीं दिया। उनके मामलों की जांच अब अनिवार्य रूप से की जाएगी। इनकम टैक्स विभाग ऐसे मामलों की जांच करेगा जहां किसी लॉ इंफोर्समेंट एजेंसी या रेगुलेटरी अथॉरिटी द्वारा टैक्स चोरी से संबंधित अहम जानकारी दी गई है।
एक सप्ताह से चल रहा अभियान
पिछले एक सप्ताह से केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड CBDT के निर्देश पर आयकर विभाग ने देश में जीएसटी चोरी, टैक्स चोरी, फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन रोकने को लेकर तेज गति से अभियान शुरू किया था। छापेमारी अभियान के दौरान जिन आयकरदाताओं के कागजात संदेहास्पद मिले हैं उन्हें सीबीडीटी की तरफ से नोटिस भेजा गया था। व्यक्तिगत करदाताओं को नोटिस भेजा था। लेकिन जिन लोगों ने अभी तक उस नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया उनके मामलों की जांच अब अनिवार्य रूप से विभाग की ओर से की जाएगी।
नई गाइडलाइन में क्या
आयकर विभाग की ओर से जारी की गई नई गाइड लाइन में दिशा-निर्देशों दिए हैं। जिसके अनुसार आयकर अधिकारियों को आय में गड़बड़ियों के बारे में इनकम टैक्स देनदारों को 30 जून तक आयकर अधिनियम की धारा 143(2) के तहत नोटिस भेजना है। इसके बाद आयकर दाता इस बारे में संबंधित कागजात पेश करेंगे। नए दिशा-निर्देशों में कहा है कि जहां अधिनियम की धारा 142(1) के तहत नोटिस के जवाब में कोई उत्तर नहीं दिया जाता है तो ऐसे मामले को नेशनल फेसलेस असेसमेंट सेंटर (NAFAC) भेजा जाएगा। जो आगे की कार्रवाई स्वयं करेगा।
आयकर अधिनियम की धारा 142(1) इनकम टैक्स विभाग को रिटर्न दाखिल किए जाने की स्थिति में एक नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगने का अधिकार है। जिन मामलों में रिटर्न दाखिल नहीं किया हो उन्हें निर्धारित तरीके से जरूरी जानकारी के साथ जमा करने को कहा जाता है।
ऐसे मामलों में आयकर विभाग एक इंटीग्रेटेड सूची जारी करता है। जिनमें सक्षम प्राधिकरण द्वारा छूट को रद्द या वापस किए जाने के बावजूद टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स रियायत अथवा कटौती की मांग करता है। निर्देश में कहा है कि अधिनियम की धारा 143(2) के तहत आयकरदाताओं को एनएएफएसी के माध्यम से नोटिस दिया जाए।

