रामकोला विधानसभा: बसपा ने उड़ाई विपक्षियों की नींद, सपा-भाजपा के प्रत्याशियों के इन कारनामों से बदला माहौल

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रामकोला विधानसभा: बसपा ने उड़ाई विपक्षियों की नींद, सपा-भाजपा के प्रत्याशियों के इन कारनामों से बदला माहौल

लखनऊ/कुशीनगर। रामकोला विधानसभा चुनाव 2022 – कभी लड़ाई से बाहर दिख रही बसपा का उभार कई सीटों पर भाजपा और सपा गठबंधन के लिए मुश्किलों का पहाड़ बनता जा रहा है। इसी क्रम में कुशीनगर जिले के अंतर्गत आने वाले रामकोला विधानसभा सीट पर हाथी के उभार ने विपक्ष को सकते में ला दिया है। गौरतलब है कि इस सीट से पिछली बार सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के रामानंद बौद्ध ने सपा के पूरनमासी देहाती को मात दी थी। इस बार भाजपा ने विनय कुमार गोंड़ और सपा-सुभासपा ने पूरनमासी देहाती को टिकट दिया है। जबकि, बसपा ने अपने पुराने कद्दावर नेता विजय कुमार को टिकट देकर इस सीट का सियासी समीकरण बिगाड़ दिया है। गौरतलब है कि इस सीट से सपा गठबंधन से चुनाव लड़ रहे पूरनमासी का एक ऑडियो वायरल हो गया है, जिसने उनकी सियासी मुश्किलें बढ़ा दीं हैं। वहीं साक्षर नेताओं की वकालत करने वाली बीजेपी के प्रत्याशी का एक वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें वो एमएलए का फुल फॉर्म तक नहीं बता पा रहे हैं।

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सियासी समीकरण समझिए

रामकोला सुरक्षित सीट है। इस सीट पर करीब साढ़े तीन लाख मतदाता है। जहां पर करीब 01 लाख के आसपास दलित वोटबैंक है। वहीं करीब 40 हजार मुस्लिम मतदाता हैं। इसके अलावा यादव 08 हजार, राजभर 13 हजार, कुर्मी 46 हजार, चौहान यानी नोनिया 15 हजार, ब्राह्मण 10 हजार और करीब 09 हजार क्षत्रिय हैं। ऐसे में दलितों की स्थिति निर्णायक है। बसपा के नेताओं का मानना है कि दलित-मुस्लिम गठजोड़ इस बार इतिहास रचेगा।

ये कांड बने बीजेपी व सपा गठबंधन के प्रत्याशियों के लिए चुनौती

भाजपा के प्रत्याशी विनय कुमार गोंड़ का एक वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें वो एमएलए का नाम नहीं बता रहे हैं। जिसके बाद से विपक्ष यह माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है कि भाजपा के एक बड़े नेता ने अपने उनको टिकट दिलवाया है, अगर वह जीते तो कुर्सी पर नाममात्र के रहेंगे, बाकी के काम बीजेपी के दिग्गज करेंगे। वहीं सपा गठबंधन के प्रत्याशी का एक ऑडियो वायरल हुआ है जिसमें वो डेढ़ करोड़ रूपये में टिकट खरीदने की बात करते हुए सुने जा रहे हैं। इन मामलों को लेकर विपक्ष खासकर बहुजन समाज पार्टी सपा और भाजपा दोनों पर हमलावर है।

लंबे समय से सक्रिय हैं बसपा प्रत्याशी

बसपा के विजय कुमार 2017 में चुनाव भी लड़ चुके हैं। बसपा से लगातार अलग हो रहे नेताओं के बीच विजय कुमार डटे रहे। उनकी सक्रियता को देखकर मायावती ने पहले कई मंडलों का को-ऑर्डिनेटर बनाया और बाद में टिकट भी दे दिया। हार के बावजूद लगातार क्षेत्र में सक्रियता से विजय कुमार की लोकप्रियता बढ़ी है। इतना ही नहीं मायावती ने उन्हें पहले ही आश्वस्त करके भेज दिया था, जिसके बाद से वो क्षेत्र में समर्थकों के साथ सक्रिय हो गए थे। वहीं सपा और भाजपा ने देर से प्रत्याशियों का ऐलान किया जो उनके लिए चुनौती भी बना है।

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बसपा के दांव, दे सकता है सबको गच्चा

बसपा ने कुशीनगर जिले में दो मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट देकर पूरे जिले की सियासी समीकरणों को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। इसका असर सभी सीटों पर पड़ता दिखाई दे रहा है। सपा द्वारा टिकट वितरण में मुस्लिमों की अनदेखी से नाराजगी भी बसपा के पक्ष में माहौल बनाती जा रही है।

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