यूरोप के सबसे बड़े चकलाघरों में से एक पाशा ने अब खुद को आधिकारिक रूप से दिवालिया घोषित कर दिया है
बीते महीनों में कोलोन के इस 10 मंजिला सेंटर को चालू रखने और अपने 60 स्टाफ का भुगतान करने में खर्च कर दी है
कोरोना वायरस के आउटब्रेक ने दुनियाभर की इकॉनमी पर असर डाला है. कई कंपनियां बंदी के कगार पर पहुंच गई है या बंद हो चुकी हैं. कोरोना वायरस की काली छाया हमेशा चकाचौंध से भरे रहने वाले वेश्यालयों पर भी पड़ी है. कोविड-19 की चपेट में आने से जर्मनी के कोलोन शहर में स्थित वेश्यालय ‘पाशा’ भी नहीं बच सका है. यूरोप के सबसे बड़े चकलाघरों में से एक पाशा ने अब खुद को आधिकारिक रूप से दिवालिया घोषित कर दिया है. पिछले कई महीनों से कोरोना महामारी के कारण लगे प्रतिबंधों के कारण उसका कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
जमा पूंजी स्टाफ और 10 मंजिला इमारत को मेन्टेन रखने में की
जर्मन दैनिक एक्सप्रेस ने खबर छापी है कि पाशा ने अपनी सारी जमा पूंजी इन बीते महीनों में कोलोन के इस 10 मंजिला सेंटर को चालू रखने और अपने 60 स्टाफ का भुगतान करने में खर्च कर दी है. कोलोन शहर जर्मन राज्य नॉर्थ राइन वेस्टफेलिया में स्थित है और कोविड-19 वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए राज्य ने पांच महीने पहले देह व्यापार पर बैन लगा दिया था. सेक्सकर्मियों के संगठन ने चेतावनी दी थी कि इस तरह ब्रॉथेल बंद करने से यह काम लुके छिपे तरीके से होने लगेगा, जिसमें महिलाओं के शोषण की कहीं ज्यादा संभावना होती है.
क्या बोले पाशा के निदेशक?
पाशा के निदेशक अरमीन लोबशाइड ने एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, “अब हम अंत पर पहुंच चुके हैं.” उन्होंने बताया कि पिछले पांच महीनों के दौरान उन्होंने अपने स्टाफ जैसे सेक्सकर्मियों, कुक, मसाज देने वालों और इमारत के रखरखाव पर अपनी सारी पूंजी लुटा दी है. अखबार ने लिखा है कि कोरोना के पहले के समय में इस सेंटर से एक समय में 120 सेक्सकर्मी फ्रीलांस आधार पर काम किया करते थे.लोबशाइड ने जर्मन प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि राज्य ने कभी साफ साफ नहीं बताया कि पांच महीने पहले लागू हुई पाबंदी कब तक चलने वाली है. अखबार से बातचीत में उन्होंने कहा, “हम इस तरह योजना नहीं बना सकते. शायद हम बैंकों से मदद लेकर दिवालिया होने से भी बच पाए होते, अगर हमें कहा जाता कि अगले साल की शुरुआत तक ही चीजें फिर से खुल सकेंगी.” पाशा के निदेशक ने यह भी कहा कि सब जानते हैं कि पैसे देकर सेक्स सेवाएं लेने का काम बैन के बावजूद बदस्तूर जारी रहा, लेकिन बिना बताए और बिना उस पर कोई टैक्स चुकाए.

