यूनाइटेड किंगडम के भविष्य को लेकर एक बार फिर बड़ी संवैधानिक बहस शुरू हो गई है। स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड की सत्ता में मौजूद राष्ट्रवादी पार्टियों के नेताओं ने सोमवार को कार्डिफ में मुलाकात कर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए और अपने-अपने क्षेत्रों के संवैधानिक भविष्य का फैसला करने का अधिकार वहां के लोगों को दिए जाने की मांग की।
स्कॉटिश नेशनल पार्टी के नेता जॉन स्विनी, वेल्स की Plaid Cymru के नेता Rhun ap Iorwerth और Sinn Féin की मिशेल ओ’नील ने आयरलैंड में विपक्ष की नेता मैरी लू मैकडोनाल्ड के साथ बैठक की। हालांकि, ये नेता इस बैठक में सरकारी प्रतिनिधियों के बजाय अपनी-अपनी पार्टियों के नेताओं के तौर पर शामिल हुए थे।
बैठक के बाद जारी समझौते में कहा गया कि ब्रिटेन की राजनीतिक तस्वीर बदल रही है और लोगों को अपने संवैधानिक भविष्य पर फैसला करने का अधिकार मिलना चाहिए।
‘Westminster का समय खत्म हो रहा है’
समझौते में ब्रिटिश सरकार से वेल्स, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड में संभावित संवैधानिक बदलाव के लिए तैयारी करने और ऐसी प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने की मांग की गई।
नेताओं ने कहा कि कोई भी Westminster सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया को रोकने या लोगों को अपने भविष्य का फैसला करने से रोकने का अधिकार नहीं रखती।
बैठक के दौरान यह संदेश भी दिया गया कि Westminster के लंबे समय से चले आ रहे प्रभुत्व को चुनौती देने वाली राजनीतिक ताकत लगातार मजबूत हो रही है।
स्कॉटलैंड चाहता है एक और जनमत संग्रह
स्कॉटलैंड में आजादी का मुद्दा लंबे समय से राजनीति के केंद्र में रहा है।
2014 में स्कॉटलैंड में स्वतंत्रता को लेकर जनमत संग्रह हुआ था, जिसमें मतदाताओं ने UK में बने रहने का फैसला किया था।
अब SNP एक और जनमत संग्रह की मांग कर रही है। जॉन स्विनी की पार्टी चाहती है कि अगले पांच वर्षों के भीतर स्कॉटलैंड को अपनी स्वतंत्रता पर दोबारा मतदान का अवसर मिले।
हालांकि, ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम की सरकार ने फिलहाल दूसरे स्कॉटिश स्वतंत्रता जनमत संग्रह को मंजूरी देने से इनकार किया है।
वेल्स में भी बढ़ रही स्वायत्तता की मांग
वेल्स की स्थिति स्कॉटलैंड से कुछ अलग है।
Plaid Cymru ने अपने मौजूदा कार्यकाल में स्वतंत्रता पर जनमत संग्रह कराने की योजना नहीं बनाई है। हालांकि, वेल्स की सरकार स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड के समान अधिक अधिकार और व्यापक स्वायत्तता की मांग कर रही है।
यही कारण है कि कार्डिफ में हुई बैठक को तत्काल UK के टूटने की घोषणा के बजाय अलग-अलग हिस्सों में बढ़ रही संवैधानिक बदलाव की मांग के रूप में देखा जा रहा है।
उत्तरी आयरलैंड में अलग है संवैधानिक रास्ता
उत्तरी आयरलैंड का मामला स्कॉटलैंड और वेल्स से अलग है।
1998 के Good Friday Agreement के तहत उत्तरी आयरलैंड के संवैधानिक भविष्य पर जनमत संग्रह का प्रावधान मौजूद है। हालांकि, ऐसा मतदान ब्रिटिश सरकार के विवेक पर कराया जा सकता है।
Sinn Féin की नेता मैरी लू मैकडोनाल्ड ने उम्मीद जताई है कि आयरलैंड के एकीकरण पर मतदान 2030 तक हो सकता है।
ट्रंप ने भी किया ‘United Ireland’ का समर्थन
इस संवैधानिक बहस के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणी ने भी राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।
हाल ही में आयरलैंड की यात्रा के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह उत्तरी आयरलैंड और रिपब्लिक ऑफ आयरलैंड को एक होते देखना चाहेंगे।
उन्होंने कहा कि आयरलैंड का एकीकरण भविष्य में होने की संभावना है और इसे वह सकारात्मक कदम मानते हैं। हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि इस मामले में ब्रिटेन की अपनी भूमिका और राय होगी।
ब्रिटिश सरकार ने उनकी टिप्पणी के बाद स्पष्ट किया कि फिलहाल उत्तरी आयरलैंड के भविष्य पर जनमत संग्रह कराने की उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
पहली बार तीनों जगह सत्ता में अलगाव समर्थक पार्टियां
इस पूरे घटनाक्रम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पहली बार स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड की सरकारों में ऐसी पार्टियां प्रमुख भूमिका में हैं जो अधिक स्वायत्तता, आत्मनिर्णय या ब्रिटेन से अलग संवैधानिक भविष्य की समर्थक हैं।
वेल्स में Plaid Cymru की चुनावी जीत के बाद यह नई राजनीतिक स्थिति बनी है।
हालांकि, तीनों क्षेत्रों की राजनीतिक परिस्थितियां और स्वतंत्रता को लेकर उनकी रणनीति अलग-अलग हैं। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि UK तत्काल टूटने की ओर बढ़ रहा है।
फिर भी कार्डिफ में हुई बैठक ने साफ कर दिया है कि ब्रिटेन के संवैधानिक ढांचे, Westminster की शक्तियों और स्कॉटलैंड, वेल्स तथा उत्तरी आयरलैंड के भविष्य को लेकर बहस आने वाले वर्षों में और तेज हो सकती है।

