साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया का विरोध आखिर रंग लाया और दबदबा था और दबदबा रहेगा कहने वाले भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह को मुंह की खानी पड़ी। खेल मंत्रालय ने WFI के चुने गए नए अध्यक्ष के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए संजय सिंह की मान्यता रद्द कर दी है. संजय सिंह, बृजभूषण शरण सिंह के बेहद करीबी हैं। उनके अध्यक्ष बनने पर कहा जा रहा था कि संजय सिंह के नाम पर बृजभूषण शरण सिंह ही WFI के अध्यक्ष बने हैं और यही वजह है कि संजय सिंह के WFI अध्यक्ष बनने पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा था कि जिसको जो सन्देश लेना हो ले, दबदबा था और दबदबा रहेगा।
बता दें कि संजय सिंह के अध्यक्ष बनने का पहलवान लगातार विरोध कर रहे थे. इसी वजह से साक्षी मलिक ने प्रेस कांफ्रेंस कर कुश्ती छोड़ने का भी ऐलान कर दिया था और बाद में पहलवान बजरंग पुनिया ने भी प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर अपना पदम् पुरूस्कार लौटाने का एलान किया था. इन दोनों घटनाओं ने सरकार को हिला दिया, इसलिए नहीं कि साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया ने सख्त विरोध जताया बल्कि इसलिए कि पहलवानों और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह का मुद्दा एक बार उछल गया और मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसे लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया। देश में अगले कुछ ही महीनों में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं ऐसे में सरकार तुरंत एक्शन में आयी और अब खेल मंत्री ने WFI अध्यक्ष पर बड़ी कार्रवाई करते हुए संजय सिंह समेत पूरी नई बॉडी को रद्द कर दिया है. जिसका मतलब ये है संजय सिंह के साथ नियुक्त किए गए सभी नए सदस्यों का भी निलंबन और संजय सिंह के सभी फैसलों पर भी रोक.
अब इसे पहलवानों के विरोध का असर कहें या राजनीतिक विवशता कि इस मुद्दे पर लगातार चुप्पी साढ़े रही मोदी सरकार ने पहली बार इस मामले में एक्शन लिया है. बता दें कि संजय सिंह को दो दिन पहले ही अध्यक्ष चुना गया था, उनके अध्यक्ष बनने पर जंतर मंतर पर आंदोलन चलाने वाले सभी पहलवानों में ज़बरदस्त गुस्सा था और बृजभूषण शरण सिंह के दबदबे वाले बयान ने उस गुस्से को और भड़काया जिसने साक्षी मलिक और बृजभूषण शरण सिंह को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर किया।

