देश में इन दिनों रेवड़ी कल्चर को लेकर ज़ोरदार बहस छिड़ी हुई है और इसके केंद्र बिंदु में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविन्द केजरीवाल है. मुफ्त उपहार कहिये या फ्री बी, गुजरात चुनाव की वजह से यह बहुत बड़ा चुनावी मुद्दा भी बना हुआ है. मुद्दा इतना गरम है कि चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुँच गया है. आज इस मामले की तीन जजों की बेंच ने सुनवाई की और सभी पक्षों के तर्क सुनने के बाद उनसे सुझाव भी मांगे। वहीँ याचिकाकर्ता इस पर एक विशेषज्ञ कमेटी बनाने की मांग कर रहे हैं हालाँकि बेंच इस मामले पर आगे गौर करने की बाद कही.
मामले की सुनवाई कर रही सीजेआई एनवी रमना की अगुवाई वाली जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस हिमा कोहली की इस मामले में अपना फैसला सोमवार को सुनाएगी। सीजेआई रमना ने कहा कि सवाल ये है कि फ्रीबीज की परिभाषा क्या है? इससे पहले आम आदमी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर विशेषज्ञ कमिटी के गठन की मांग का विरोध किया था.आप द्वारा कहा गया था कि ऐसी घोषणाओं पर प्रतिबंध लगाना संविधान के अनुच्छेद 19 1A के तहत फ्रीडम ऑफ स्पीच की गारंटी के खिलाफ है.
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इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त उपहार देने के वादे को गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा था कि इसके बजाय बुनियादी ढांचे पर राशि खर्च की जानी चाहिए. बता दें कि वड़ी कल्चर पर रोक लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने एक याचिका दायर की थी. बेंच ने चुनाव आयोग से इस मामले में एक गाइडलाइन तैयार करने को कहा था, लेकिन चुनाव आयोग ने क़ानून के अभाव की बात कहते हुए राजनीतिक दलों द्वारा फ्री बी के वादों को रेगुलेट नहीं कर पाने की बात कही थी.

