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देश में सत्ता बदलती रही और बढ़ता गया CBI और ED के निशाने पर विपक्षियों के आने का ग्राफ

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नई दिल्ली। तीन दशकों में केंद्रीय जांच एजेंसियों के निशाने पर आए विपक्षी नेताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। केंद्र में सत्ता बदली तो जांच एजेंसियों के निशाने पर विपक्षी नेता आते रहे। भाजपा सरकार में यह कोई नया मामला नहीं है। भाजपा सरकार में भी विपक्षी दल कांग्रेस की सोनिया गांधी से लेकर आप के मनीष सिसोदिया तक, अनेक बड़े नेता जांच एजेंसी के फेर में फंस चुके हैं।

यूपीए सरकार में 2004 से 2014 के बीच सीबीआई ने जिन नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया । उनमें विपक्ष के करीब 60 प्रतिशत नेता शामिल थे। उस दौरान 70 से अधिक नेताओं को सीबीआई की जांच का सामना करना पड़ा। इसमें 40 से अधिक नेता विपक्षी दलों के थे।

यूपीए से आगे निकली एनडीए

एनडीए सरकार में यह संख्या बढ़कर 95 प्रतिशत तक पहुंच गई है। 2014 से लेकर 2023 तक लगभग 125 बड़े नेता सीबीआई जांच के चंगुल में फंसे हुए हैं। खास बात है कि इनमें से लगभग 120 नेता विपक्षी पार्टियों के हैं। ईडी का रिकॉर्ड कुछ ऐसा है। पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार में ईडी ने 112 छापे डाले थे। कांग्रेस के मुताबिक, एनडीए सरकार यानी पीएम मोदी की सरकार में ईडी की 3010 से अधिक छापेमारी हुई हैं।


गृहमंत्री अमित शाह भी आए थे घेरे में

यूपीए सरकार में सीबीआई ने कोयला ब्लॉक आवंटन , 2जी स्पेक्ट्रम, राष्ट्रमंडल खेल और जैसे मामलों की जांच की थी। मनमोहन सिंह सरकार के दौरान सीबीआई ने 40 से अधिक विपक्षी नेताओं से पूछताछ की थी। इनमें भाजपा के 14 नेता शामिल थे। मौजूदा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी उस सीबीआई जांच के दायरे में आए थे। उस समय अमित शाह गुजरात सरकार में मंत्री थे। जांच एजेंसी ने उन्हें सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ में हुई हत्या के मामले में गिरफ्तार किया था। सीबीआई जांच के दायरे में आए एनडीए के दूसरे बड़े नेताओं में जनार्दन रेड्डी, बीएस येदियुरप्पा और पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस भी थे। एमके स्टालिन और मुलायम सिंह यादव से भी सीबीआई ने पूछताछ की थी।


एनडीए सरकार में ये नेता फंसे जांच एजेंसियों के जाल में

मोदी सरकार के दौरान कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों के नेता, जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं। इनमें विपक्षी नेताओं की संख्या अधिक है। गत वर्ष कांग्रेस नेता एवं अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा था, केंद्र सरकार अपनी जांच एजेंसियों की मदद से विपक्ष को एकत्रित नहीं होने दे रही। जैसे विपक्षी दल, सरकार को घेरने का प्रयास करते हैं।

उन्हें जांच एजेंसिया टारगेट पर लेती है। खरगे को भी ईडी ने पूछताछ के लिए बुलाया था। कांग्रेस के बड़े नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल भी ईडी की पूछताछ को भुगत चुके हैं। पश्चिम बंगाल सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे पार्थ चटर्जी ईडी के शिकंजे में फंस चुके हैं। शिवसेना के संजय राउत ईडी जांच का सामना कर रहे हैं।

टीएमसी सांसद अभिषेक ईडी के रडार पर हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से भी ईडी द्वारा पूछताछ कर चुकी है। आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री सत्येंद्र जैन, ईडी मामले में हिरासत में हैं। दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। वे चार मार्च तक रिमांड पर हैं।


ईडी को बताया ‘इलेक्शन मैनेजमेंट डिपार्टमेंट’

जम्मू कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी जांच में फंसे हुए हैं। महाराष्ट्र में शरद पवार के भतीजे अजित पवार मनी लॉन्ड्रिंग के केस में हैं। पूर्व मंत्री नवाब मलिक, ईडी मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं। अवैध रेत खनन मामले में पंजाब के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी से ईडी पूछताछ कर चुकी है।

कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा, विपक्ष के जो नेता मुंह बंद करते हैं या भाजपा में चले जाते हैं, वो ईडी की कार्रवाई से बच जाते हैं। उन्होंने ईडी को भाजपा का ‘इलेक्शन मैनेजमेंट डिपार्टमेंट‘ बताया था। असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा, भाजपा में शामिल हो गए। उनके केसों में जांच एजेंसी शांत हो गई है।

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा, रमन सिंह, नारायण राणे, मुकुल रॉय और सुवेंदु अधिकारी जैसे नेताओं के पीछे जांच एजेंसी पड़ी थी। आज वे सब बाहर क्यों हैं! जांच एजेंसी उनसे पूछताछ क्यों नहीं कर रही! ईडी ने छत्तीसगढ़ में पीसीसी कोषाध्यक्ष राम गोपाल अग्रवाल, भिलाई विधायक देवेंद्र यादव, आरपी सिंह, गिरीश देवांगन, विनोद तिवारी के अलावा सन्नी अग्रवाल के निवास और कार्यालयों पर छापेमारी की। कांग्रेस के मुताबिक, मोदी सरकार में ईडी ने जिन राजनेताओं के यहां पर रेड की है या उनसे पूछताछ की उनमें 95 फीसदी विपक्ष नेता हैं। इसमें सबसे अधिक छापेमारी कांग्रेस पार्टी के नेताओं के घरों और दफ्तरों पर की गई हैं।

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