Holi Special 2022: जड़ी बुटियों और प्राकृतिक रंग मिलाकर खेलने से दूर होगी बीमारिया और कुप्रभाव

धर्मHoli Special 2022: जड़ी बुटियों और प्राकृतिक रंग मिलाकर खेलने से दूर...

Date:


Holi Special 2022: जड़ी बुटियों और प्राकृतिक रंग मिलाकर खेलने से दूर होगी बीमारिया और कुप्रभाव

आप अपनी जन्म कुण्डली अथवा हस्त रेखा से जान लें कि कौन से ग्रह आपके नीच प्रभावी अथवा शत्रु क्षेत्रिय या विपरित असर देने वाले हैं। तब आप समझ सकते हैं कि आप कौन-कौन से बीमारियों से ग्रस्त हो सकते हैं पर अब भय की आवश्यकता नहीं है। होली जैसे जागृति महापर्व पर कीजिये ग्रहों के कुप्रभावों को शान्त व अपने अनुकूल जड़ी बूटियों आदि के स्व रस से होली खेल कर।

सूर्य – जब भी सूर्य कुप्रभावी होता है तो आंखों की बीमारी, दिल का दौरा, पेट संबंधित समस्या, चर्म रोग, हिस्टीरिया के दौरे तथा किसी न किसी प्रकार के घाव होने के योग बन जाते हैं। ऐसी स्थिति में बिल्व अर्थात बेल पत्र वृक्ष की जड़ के साथ गेहूं, गुड़, लाल चन्दन, लाल रोली, लाल गुड़हल से निर्मित जल से होली खेलें।

Read also: Holika Dahan 2022: होली पर इस बार रहेगा भद्रा का साया, जानिए होलिका पूजन का शुभ मुहूर्त

चन्द्र – चन्द्र कुप्रभावी होने से नींद न आना, अपच होना, मानसिक असंतुलन, कफ की बढ़ोत्तरी व गठिया आदि जैसे रोग पैदा हो जाते हैं। इसके लिए खिरनी की जड़ को दूध के संग घिसे चन्दन में घोल कर होली खेलें।

मंगल – मंगल बुरा प्रभावी होने पर रक्त संबंधी बीमारियां, आंखों व गले का रोग, किसी प्रकार का दौरा पड़ना, सर दर्द व बुखार जैसी समस्यायें देता है जिनको दूर करने के लिए लाल अनन्त मूल की जड़ गुड़, सौंफ, शहद, लाल मसूर, देसी खाण्ड से युक्त जल से होली खेलें।

बुध – बुध यदि खराब प्रभावी हो तो नाक कान की बीमारी के साथ-साथ वात, पित की गड़बड़ी, चर्म रोग तो देता ही साथ ही ऊंचे स्थान से गिरने के भी योग बनाता है। इसके लिए विधारा की जड़ को फिटकरी के साथ जल में घोल कर होली खेलें।

बृहस्पति – बृहस्पति ग्रह प्रतिकूल प्रभावी होने से गैस संबंधी तकलीफें, कानों में कोई न कोई दर्द, तरह तरह के बुखारों के कष्ट झलने पड़ते हैं। इन रोगों के निवारण के लिए नारंगी, हल्दी, केसर के रंगों से होली खेंले।

Read also: Unique Holi Traditions in India: अनोखी परम्पराओं के साथ चढ़ता है होली की मस्ती का रंग

शुक्र – शुक्र के पीड़ित करने से मूत्र विकास, गर्भाशय, अण्डकोष, गुप्तरोग, वीर्य विकार, कोढ़ आदि बीमारियां सम्भव हो जाती है इन रोगों से बचने के लिए मजीठ की जड़ को दही, घी, कपूर, सुगन्धित इत्र आदि के साथ होली खेंले

शनि – शनि के कुपित हो जाने पर आकस्मिक दुर्घटना, गठिया व लम्बी बीमारियों के पेट व वात रोग बढ़ जाते हैं। इसके निवारण के लिए शमि वृक्ष की छाल अथवा जड़ को काले नमक घोल कर होली खेंले।

राहु – राहु की कुदृष्टि होने पर हृदय संबंधी विकार, अपचय, असाध्य चर्म रोग तथा बावासीर जैसी तकलीफें शुरू हो जाती है। इसके निवारण के लिए सफेद चन्दन के साथ काले तिल, काली सरसों व सिंघाडे का आटा घोल कर होली खेलें तथा अभ्रक युक्त गुलाल से भी होली खेलना राहु की अनुकूलता दे सकेगा।

Read also: Holi Upay 2022: होली पर करें ये काम तो दूर होगी जिंदगी में हर प्रकार की रूकावटें

केतु – केतु कुपित होने पर शरीर पर किसी न किसी तरह के घाव पांव में देता है साथ ही दांत संबंधी बीमारी व आग से जलने के कष्ट भी देता है इसके लिए अश्वगंध की जड़ काले सफेद तिल मिश्रित करके उबले जल से होली खेलने पर इस प्रकार की व्याधियां शांत होने के योग बनते हैं।

इस प्रकार होली में विभिन्न ग्रहों से संबंधित जड़ी बूटियों के सत व रस का प्रयोग व्याधियों से मुक्तियों का वरदान भी प्राप्त करा सकेगा।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

PoK में बढ़ते तनाव पर संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता, निष्पक्ष जांच और राजनीतिक बातचीत की अपील

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने पाकिस्तान...

प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन कैसे करें? स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन करने से पहले...

प्रधानमंत्री आवास योजना क्या है? पात्रता, लाभ और आवेदन प्रक्रिया

प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर लोगों के मन में...