RBI Decision On 2000 Note: पहले छपाई बंद, अब नोटों की वापसी का एलान; जानें मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक प्लान

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RBI Decision On 2000 Note: RBI ने दो हजार के नोटों पर बड़ा फैसला लिया है। अचानक से लिए गए इस फैसले से देश भर में भूचाल आ गया है। इसका सबसे बड़ा असर राजनैतिक पार्टियों और कालाधन एकत्र करने वालों पर पड़ेगा। केंद्र सरकार और आरबीआई द्वारा लिए गए अचानक से इस फैसले से देश के सभी महानगरों में हलचल हो गई है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने दो हजार रुपए के नोट को वापस लेने का एलान किया है। हालांकि, अभी 2000 के नोट देश में 30 सितंबर तक वैध रहेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को सलाह दी है कि वे तत्काल दो हजार रुपए के नोट जारी करना बंद करे। आरबीआई ने कहा कि 30 सितंबर तक 2000 के नोट वैध मुद्रा बने रहेंगे। जिनके पास इस समय दो हजार रुपए के नोट हैं वो 30 सितंबर तक उन्हें बैंक से बदल लें।

2018 से 2000 के नोट छापने किए बंद

आरबीआई के अनुसार, 2018-19 में 2000 के नोट छापना बंद कर दिया था। साल नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद 2000 हजार रुपए का नोट सरकार चलन में लाई थी। नोटबंदी में 500 और 1000 रुपए के नोट बंद कर दिए थे। आरबीआई ने क्यों किया 2000 के नोट वापस लेने का एलान आर्थिक मामलों के जानकारों की माने तो जब 2016 में आरबीआई ने हजार और पांच सौ के नोटों को बैन कर 2000 के नोट जारी किए थे, तभी तय था कि इसे अधिक समय तक नहीं चलन में रखा जाएगा। केंद्र सरकार ने अपनी रणनीति के तहत काम किया। आज आरबीआई की इस घोषणा के बाद नोटबंदी को पूरी तरह से अंजाम दिया जा रहा है।

कालाधन पर सरकार का प्रहार

हाल की घटनाओं पर नजर डालें तो लोग कालाधन रखने के लिए 2000 रुपए के नोटों का उपयोग कर रहे थे। इसे सरकार भी मानती है। भाजपा राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी इस मामले को संसद में उठा चुके हैं। 2019-19 से आरबीआई ने 2000 हजार के नोटों को छापना बंद कर दिया था। आम लोगों के पास अब बहुत कम 2000 के नोट बचे हैं। लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिन्होंने इन 2000 के नोटों का इस्तेमाल काली कमाई और कालाधन रखने में करना शुरू किया। अब आज जब आरबीआई ने 2000 के नोटों को बंद करने का एलान कर दिया तो साफ है कि फिर से बड़े पैमाने पर कालाधन बाहर आएगा। जो लोग 2000 के नोट बैंक में बदलने जाएंगे, उन पर सरकार की नजर रहेगी। अगर अधिक मात्रा में किसी के पास दो हजार के नोट निकले तो वह सीधे ईडी व आरबीआई के निशाने पर होगा।

आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग पर ब्रेक

2016 में जब 500 और हजार के नोट बंद हुए तो आतंकवादियों के फंडिंग में बड़ा अंकुश लगा था। इसी तरह मनी लॉन्ड्रिंग रूक गई थी। धीरे-धीरे इस काम में 2000 के नोटों का उपयोग होने लगे थे। अब इसके जरिए आतंकवादियों के फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर फिर से सरकार ने प्रहार किया है।

नकली नोटों की छपाई पर लगाम

2000 के नकली नोटों की छपाई तेजी से होने लगी थी। ऐसा इसलिए कि ये आसानी से बाजार में चलन में था। इसकी सप्लाई में अधिक परेशानी नहीं होती थी। अब इस पर बैन लग रहा है तो साफ है कि 2000 के जितने नकली नोट बाजार में होंगे वो साफ हो जाएंगे। इसके अलावा 2000 के नकली नोटों की छपाई पर काफी हद तक प्रभावित होगी।

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