कभी मोदी सरकार और बाबा रामदेव ने बड़े नोटों को भ्रष्टाचार का बड़ा माध्यम बताया था, मोदी सरकार ने बाद में रातों रात 1000 और 500 नोटों को रद्द घोषित कर भारतीय अर्थव्यवस्था में तूफ़ान ला दिया था, नोटबंदी के वो दृश्य आज भी लोगों को अच्छी तरह याद होंगे। कई महीने तक देश में अफरातफरी का माहौल रहा. नोटबंदी कितनी फायदेमंद रही यह बहस का विषय है लेकिन हैरानी इस बात पर ज़्यादा थी कि एक हज़ार की जगह दो हज़ार का नोट क्यों जारी किया गया. खैर अब एकबार फिर बड़े नोट को बंद करने की बात उठी है, और मुद्दा भाजपा के सांसद और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने राज्यसभा में उठाया है
सरकार जारी करे स्पष्टीकरण
संसद के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन सुशील कुमार मोदी ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान 2000 रुपए के नोट को बंद करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि ब्लैक मनी को अगर बंद करना है तो 2000 के नोट को बंद कर देना चाहिए. भाजपा सांसद ने आगे कहा कि वैसे भी 2000 रूपये का नोट बाजार में कहीं नज़र नहीं आता, बैंकों में भी मिलता और न ही एटीएम से निकलता है, ऐसे में देश में एक अफवाह सी उड़ रही है कि सरकार ने 2000 रूपये का नोट बंद कर दिया, सुशील मोदी ने कहा कि सरकार को इस बारे में स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए।
ब्लैकमनी को मिल रहा है बढ़ावा
सुशील मोदी ने कहा कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने पिछले तीन सालों से 2000 के नोटों की छपाई बंद कर रखी है, ब्लैक मार्किट में इसका ज़्यादा भाव मिल रहा है जो ब्लैकमनी को बढ़ावा दे रहा है. इन नोटों का इस्तेमाल गलत कामों में हो रहा है. भाजपा संसद ने कहा कि अधिकांश देशों में बड़े नोटों का प्रचलन बंद हो चूका है. नोट बंदी समय की ज़रुरत थी इसलिए 2000 का नोट सरकार ने जारी किया था ताकि बाजार में तरलता बरकरार रहे लेकिन वो उद्देश्य अब पूरा हो चूका है इसलिए मेरा सरकार से अनुरोध है कि चरणबद्ध तरीके से 2000 के नोट को बंद कर देना चाहिए और नोट बदलने के लिए जनता को पर्याप्त समय भी देना चाहिए।

