लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के चौथे चरण (fourth phase) में रायबरेली (Raibareli) जिले में मतदान हो चुका है। वैसे तो रायबरेली लोकसभा सीट परंपरागत तौर पर कांग्रेस का गढ़ रही है, लेकिन इस चुनाव से पहले कांग्रेस विधायक अदिति सिंह ने पाला बदलते हुए भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। ऐसे में चुनावी समीकरणों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। बता दें कि रायबरेली में कुल छह विधानसभा सीट हैं। वर्ष 2017 के चुनाव में रायबरेली सदर और हरचंदपुर से कांग्रेस प्रत्याशी जीते थे। सरेनी, बछरांवा और सलोन बीजेपी ने तो वहीं, समाजवादी पार्टी ने ऊंचाहार सीट पर कब्जा जमाया था।
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रायबरेली विधानसभा सीट
विधानसभा चुनाव 2022 में प्रत्याशी
भाजपा- कांग्रेस से आईं अदिति सिंह
कांग्रेस- डॉ. मनीष चौहान
सपा- आरपी यादव
बसपा- मो. अशरफ
इस सीट पर सन् 1993 यानी बीते तीन दशकों से सदर विधायक रहे कांग्रेस के स्व. अखिलेश सिंह और उनके परिवार का वर्चस्व रहा है। विधानसभा चुनाव 2017 में स्व. अखिलेश सिंह की बेटी अदिति सिंह ने इस सीट से जीत हासिल की। हालांकि, वर्ष 2019 में अखिलेश सिंह के निधन हो गया, जिसके बाद से ही अदिति सिंह का कांग्रेस से मोहभंग होने लगा। इसके बाद उन्होंने 2021 में अदिति सिंह भाजपा में शामिल हो गईं (Aditi Singh joined BJP) और पार्टी ने उन्हें इसी सीट से अपना प्रत्याशी बनाकर उतार दिया। इस बार यहां किसका परचम लहराएगा यह काफी दिलचस्प होगी। इस विधानसभा क्षेत्र में करीब 3,51,000 मतदाता हैं। जिनमें 32 फीसदी दलित, 30 फीसदी पिछड़ी जाति के लोग और 12 फीसदी मुस्लिम हैं।
सलोन सुरक्षित सीट
विधानसभा चुनाव 2022 में प्रत्याशी
भाजपा- दल बहादुर की जगह अशोक कोरी
कांग्रेस- सुरेश चौधरी की जगह अर्जुन पासी
सपा- जगदीश प्रसाद
बसपा- स्वाति सिंह
कांग्रेस के प्रभाव वाली सीट रही सलोन विधानसभा सीट पर भाजपा ने 2017 में अपना परचम लहराया था। बीजेपी उम्मीदवार दल बहादुर कोरी ने कांग्रेस के सुरेश चौधरी को 16,055 वोट से मात दी थी। वहीं, 2012 के चुनाव में यहां सपा की आशा किशोर विजयी हुई थीं। वहीं, सलोन विधानसभा में करीब 3,39,000 मतदाता हैं। यहां अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं के अलावा ब्राह्मण और राजपूतों की भी बड़ी संख्या है।
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ऊंचाहार विधानसभा सीट
विधानसभा चुनाव 2022 में प्रत्याशी
भाजपा- अमरपाल मौर्य
सपा- मनोज पांडेय
बसपा- अतुल सिंह
कांग्रेस- अंजलि मौर्य
ऊंचाहार विधानसभा सीट पर लगातार दो बार से (2012 और 2017) समाजवादी पार्टी (Samajwadi party) के मनोज पांडेय का कब्जा रहा है। सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे मनोज पांडेय इस बार के चुनाव में भी इस सीट पर अपना कजा बरकरार रखने के लिए बेताब हैं। तो वहीं, स्वामी प्रसाद मौर्य व बीजेपी नेता अतुल सिंह के दल-बदल से यहां मुकाबला रोमांचक हो गया है। दलित बाहुल्य ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र में करीब 3,25,000 मतदाता हैं।
हरचंदपुर विधानसभा सीट
विधानसभा चुनाव 2022 में प्रत्याशी
भाजपा- राकेश सिंह
सपा- राहुल लोधी
कांग्रेस- सुरेंद्र विक्रम सिंह
बसपा- शेर बहादुर
वर्ष 2012 से अस्तित्व में आई इस विधानसभा सीट पर 2017 में मोदी लहर के बावजूद कांग्रेस (Congress) जीतने में कामयाब रही। कांग्रेस प्रत्याशी राकेश सिंह ने इस सीट पर भाजपा की कंचन लोधी को हराया था। इससे पूर्व 2012 में समाजवादी पार्टी के सुरेंद्र विक्रम सिंह ने कांग्रेस के शिव गणेश लोधी को हराया था। ऐसे में इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला होने की उम्मीद है। बता दें कि हरचंदपुर विधानसभा क्षेत्र में करीब 3,03,000 मतदाता हैं।
बछरावां सुरक्षित सीट
विधानसभा चुनाव 2022 में प्रत्याशी
भाजपा-अपना दल (एस) गठबंधन- लक्ष्मीकांत रावत
सपा- पूर्व विधायक श्यामसुंदर भारती
कांग्रेस- सुशील पासी
बसपा- लाजवंती कुरील
कभी बछरावां विधानसभा सीट कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी। लेकिन, वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी और 2017 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर अपना कब्जा जमाया। विधानसभा चुनाव 2017 में बछरावां सीट पर भाजपा के रामनरेश रावत ने कांग्रेस के साहब सरन को 22,309 वोट से हराया था। वहीं, बछरावां विधानसभा में करीब 3,12,000 मतदाता हैं। यहां एससी की आबादी अच्छी खासी है, लेकिन ब्राह्मण, ठाकुर, यादव और मुस्लिम के वोट निर्णायक हो सकते हैं।
सरेनी विधानसभा सीट
विधानसभा चुनाव 2022 में प्रत्याशी
भाजपा- निवर्तमान विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह
कांग्रेस- सुधा द्विवेदी
सपा- पूर्व विधायक देवेंद्र प्रताप सिंह
बसपा- ठाकुर प्रसाद यादव
विधानसभा चुनाव 2017 में भाजपा से धीरेंद्र बहादुर सिंह ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) के ठाकुर प्रसाद यादव को 13,007 मतों से हराया था। इस बार कांग्रेस से सुधा द्विवेदी नई प्रत्याशी होने के साथ क्षेत्र के लिए भी नई हैं। जबकि, भाजपा, सपा और बसपा ने पुराने उम्मीदवारों पर ही भरोसा जताया है। सरेनी विधानसभा में करीब 3,51,000 मतदाता हैं। अनुसूचित जाति के प्रभुत्व वाली इस सीट पर सभी दलों ने यहां जातीय समीकरणों का ध्यान में रखते हुए प्रत्याशी उतारे हैं। हालांकि, इस बार की जीत 90 हजार ब्राह्मण मतदाताओं के हाथ में है।

