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मुख्यमंत्री के नाम तय करने में देरी क्यों?

आर्टिकल/इंटरव्यूमुख्यमंत्री के नाम तय करने में देरी क्यों?

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अमित बिश्नोई
देश के पांच राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में जहाँ राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा को बड़ी कामयाबी हासिल हुई वहीँ कांग्रेस को पहली बार तेलंगाना में सफलता नसीब हुई और मिजोरम में MNF से टूटकर गठित हुए एक अलग दल ZPM को बहुमत हासिल हुआ. इन दोनों राज्यों में मुख्यमंत्रियों ने शपथ लेकर सरकार चलाना भी शुरू कर दिया है. तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवांता रेड्डी ने शपथ लेने के एक दिन बाद ही अपनी पार्टी के चुनावी वादों में से एक वादे पर अमलदरामद भी शुरू कर दिया और प्रदेश की महिलाओं को सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा का आदेश भी लागू कर दिया है लेकिन भाजपा में अभी मुख्यमंत्री के नाम को लेकर चर्चा का दौर ही चल रहा है. राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कौन होगा, किसी भी नाम पर एक राय नहीं बन पायी है. अटकलों का दौर जारी है, बहुत से नाम गर्दिश में हैं जो मुख्यमंत्री की दौड़ में बताये जा रहे हैं, इनमें से कई नाम तो बिलकुल नए हैं. कहा जा रहा है कि प्रयोगों में माहिर भाजपा चुनाव जीतने वाले राज्यों में नए चेहरे भी ला सकती है और शायद इसीलिए नाम फाइनल करने में देरी की जा रही है.

ख़बरों की मानें तो तीनों राज्यों में विधायक दल की बैठक कब होगी इसकी तारीख़ सामने आ गयी है, इसका मतलब भाजपा आला कमान ने मुख्यमंत्री पद के लिए नाम फाइनल कर लिए हैं और अब उसपर विधायक दलों को सिर्फ मुहर लगानी है. जो जानकारी सामने आयी है उसके हिसाब से छत्तीसगढ़ में 9 दिसंबर को भाजपा विधायक दल की बैठक होगी जिसमें सीएम पद से पर्दा उठेगा। पता चलेगा कि मोदी-शाह और नड्डा ने किस पर भरोसा जताया है, क्या रमन सिंह एकबार फिर प्रदेश में भाजपा की कमान संभालेंगे या फिर कोई नया चेहरा सामने आएगा। वैसे चुनाव के दौरान तो रमन सिंह कुछ ख़ास सक्रीय नज़र नहीं आये फिर भी उनके पास सरकार चलाने का काफी अनुभव है.

वहीँ राजस्थान और मध्य प्रदेश के विधायक दल की मीटिंग 10 दिसंबर को होगी। कहा जा रहा है कि इसी दिन मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान हो जाएगा। इन दोनों राज्यों में अगर सीएम चेहरे की बात करें तो मध्य प्रदेश में निर्विवाद रूप से शिवराज चौहान हैं वहीँ राजस्थान में वसुंधरा राजे काफी बड़ा नाम है लेकिन सवाल ये उठता है कि भाजपा आलाकमान मध्य प्रदेश में शिवराज चौहान को एक बार फिर मुख्यमंत्री बनाकर उनका कद बड़ा करेगी या फिर चुनाव जीतने के बाद उन्हें एकबार फिर साइड लाइन कर देगी जैसा कि शुरुआत में चुनाव प्रचार के दौरान किया था. मध्य प्रदेश की बात करें तो भाजपा आला कमान ने केंद्र से कई बड़े नामों को मध्य प्रदेश भेजकर बता दिया है कि शिवराज ही सीएम होंगे ये ज़रूरी नहीं। कैलाश विजयवर्गीय शुरू से सीएम पद के लिए ताल ठोंक रहे हैं, चुनाव जीतने के बाद भी उन्होंने ये कहकर कि मध्य प्रदेश में भाजपा की प्रचंड जीत में लाड़ली बहना योजना की कोई भूमिका नहीं है, शिवराज चौहान का कद घटाने की कोशिश की. विजयवर्गीय ने कहा कि तीनों राज्यों में सिर्फ मोदीजी की गारंटियों की वजह से भाजपा को जीत मिली है. उनका तर्क है कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कौन सी लाड़ली बहना योजना थी. विजयवर्गीय को मध्य प्रदेश में सीएम पद का उम्मीदवार बताया जा रहा है, कहा जा रहा है कि भाजपा आलाकमान ने अगर कोई नया चेहरा उतारा तो वो चेहरा विजयवर्गीय हो सकते हैं वहीँ कुछ लोगों का कहना है कि विजयवर्गीय इस तरह के बयान देकर अपने को हाई लाइट करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन सभी जानते हैं कि मोदी-शाह पर ऐसे हथकंडों का कोई असर नहीं पड़ता। मध्य प्रदेश में भाजपा ने कई मंत्री और सांसदों को चुनाव लड़ाया जिन्होंने जीत भी हासिल की. जीत हासिल कर उनमें से ज़्यादातर लोगों ने सांसदी से इस्तीफ़ा दे दिया है तो इसका मतलब वो सभी सीएम की दौड़ में शामिल हैं.

रही बात राजस्थान की तो वहां भी मध्य प्रदेश जैसे ही हालात हैं. वसुंधरा राजे बड़ा चेहरा होने के बावजूद ज़रूरी नहीं कि फिर मुख्यमंत्री बनें , हालाँकि उन्होंने दिल्ली की दौड़ शुरू कर दी है. राजस्थान में भाजपा ने केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को मैदान में उतारा था, चुनाव जीतकर उन सभी ने भी सांसदी छोड़ विधायक बनना स्वीकार किया है, देखना होगा कि सांसदी उन्होंने सिर्फ विधायक बनने के लिए छोड़ी या फिर उनके पास भी मुख्यमंत्री बनने का मौका है. दरअसल भाजपा ने इसबार बिना किसी नाम के राज्यों का चुनाव लड़ा था, अगर कोई नाम था तो वो सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी का था. इसीलिए भाजपा आलाकमान ऐसे किसी भी चेहरे को मुख्यमंत्री के रूप में सामने लाना चाहेगी जो 2024 में होने वाले चुनाव में पीएम मोदी को एकबार फिर सत्ता में पहुँचाने में मददगार हो सके, जो भाजपा की चुनावी रणनीति में फिट हो सके और शायद इसलिए मुख्यमंत्री का नाम तय करने के लिए भाजपा आला कमान को काफी माथापच्ची करनी पड़ रही है.

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