देहरादून। मानसून सिर पर आ गया है। हालांकि बरसात अभी पूरी तरह से शुरू नहीं हुई है। लेकिन कम बारिश में ही नदियों के साथ बरसाती नाले पूरे उफान पर आ रहे हैं। अभी तक नदियों के किनारे की आबादी, खेती बचाने के लिए मजबूत तटबंध का काम पूरा नहीं हुआ है। प्रदेश में कुछ जिले तो ऐसे हैं जहां पर काम ही नहीं शुरू हुआ है।
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आने वाली मानसूनी बरसात में प्रदेश को होने वाले नुकसान से कैसे बचाए जाए। इसके लिए ना तो महकमों में कोई तैयारी है और ना इसके लिए कोई जवाब देने के लिए तैयार है। बता दें कि हर साल नदियों के तेज बहाव से बड़े पैमाने पर करोड़ों का नुकसान होता है।
राजधानी देहरादून नगर निगम क्षेत्र में बड़े इलाकों में नदी किनारे पुश्तों का काम ही नहीं शुरू हुआ है। गांधीग्राम सत्तोवाली घाटी,कांवली रोड बिंदाल क्षेत्र, चक्खु मौहल्ला, न्यू बस्ती पटेलनगर, रिस्पना पुल, गोविंदगढ़ टीचर कालोनी, बिंदाल पुल से लगे इलाके में जहां बरसात के दिनों में काफी नुकसान होता है। अभी तक तटबंध का काम नहीं हुआ है। इन कार्यों के प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे हैं। अभी तक किसी योजना को स्वीकृति नहीं मिली। अधिशासी अभियंता रघुवीर सिंह गुसाईं ने बताया कि चारों नदियों पर बाढ़ सुरक्षा के कार्यों के प्रस्ताव स्वीकृति नहीं हुए हैं। वहीं चमोली जिले में पिंडर नदी किनारे थराली तटबंध 2013 की आपदा में बह गए थे। इन पर भी अभी तक काम शुरू नहीं हुआ। थराली के पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुशील रावत ने बताया कि सीएम की घोषणा के बाद भी तटबंध पर काम नहीं शुरू हुआ है।
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नरेंद्रनगर में 13 स्थानों पर बाढ़ नियंत्रण के लिए चिन्हित हुए हैं। आपदा प्रबंधन अधिकारी बृजेश भट्ट के अनुसार मानसून में बाढ़ नियंत्रण वाले स्थान चयनित कर बजट का प्रस्ताव दिया है। केदार मोहल्ला से श्रीकोट तक ढाई किमी की सुरक्षा दीवार निर्माण कार्य के इंतजार में है। इसके लिए भी अभी तक बजट स्वीकृत नहीं हुआ है।

