अहमदाबार सीरियल ब्लास्ट के इन तीन आरोपियों का है पश्चिमी उप्र के इन जिलों से कनेक्शन

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अहमदाबार सीरियल ब्लास्ट के इन तीन आरोपियों का है पश्चिमी उप्र के इन जिलों से कनेक्शन

मेरठ। Ahmedabad Serial Blast Case 2008 – गुजरात के अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के आरोप में दोषी पाए गए 38 आरोपियों को अहमदाबाद की विशेष अदालत ने फांसी की सजा सुनाई। इन 38 सिद्ध दोष में तीन का पश्चिमी उप्र के जिलों बुलंदशहर, मेरठ और बिजनौर से भी कनेक्शन है। हालांकि इन तीनों दोषियों के परिजन अब गांवों में नहीं रहते हैं। लेकिन आज भी इनके रिश्तेदार और खानदान के लोग गांव में निवास करते हैं। फांसी की सजा पाए तीनों दोषियों के परिजन इस समय दिल्ली में रह रहे हैं।

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इनमें से बुलंदशहर के कस्बा औरंगाबाद क्षेत्र के गांव लोहरका का निवासी शकील जो कि अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों में आरोपित है और विशेष अदालत ने इसको भी फांसी की सजा सुनाई है। इसके बारे में लोहरका गांव के ग्रामीणों का कहना है कि वह बचपन में गांव की गलियों में कंचे खेलता रहता था। सुबह से शाम तक कंचे खेलता था। कभी—कभी नकली बम बनाकर उनको फोड़ने की प्रैक्टिस भी करता था। ग्रामीणों का कहना है कि तीन दशक पहले ही शकील का परिवार दिल्ली के संगम विहार में जाकर रहने लगा था। एक बुजुर्ग ग्रामीण ने बताया कि बचपन में शकील नकली बमबाजी का खेल खेलता था। बड़ा होकर असली बमबाज बन जाएगा यह कभी सोचा भी नहीं था। उनका कहना है कि शकील को बेवजह फंसाया गया है। वह बेहद सीधा किस्म का युवक है। शकील के परिवार में तीन भाई वह अपने तीनों भाइयों में सबसे बड़ा है। दिल्ली में रहने के दौरान ही शकील ने वहां से स्नातक किया था। शकील के चाचा हसमुद्दीन औरंगाबाद में रहते हैं। हसमुददीन से शकील के बारे में की गई तो उन्होंने बात करने से मना कर दिया।

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वहीं बिजनौर के नजीबाबार के मोहल्ला पठानपुर का रहने वाला तनवीर भी इस मामले में फांसी की सजा पाया हुआ आरोपी है। तनवीर भी जेल में हैं। अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट से पहले तनवीर का परिवार यहां से चला गया था। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि तनवीर सीरियल धमाकों से पहले ही गुजरात बिजनेस के लिए चला गया था। तनवीर को अपराधिक प्रवृत्ति का बताया जाता था। वह नशा भी करता था। ब्लास्ट से पहले तनवीर अहमदाबाद गया और धमाकों के बाद उसे अहमदाबाद से एटीएस ने पकड़ा था। वहीं एक और आरोपी जियाउर्रहमान को भी फांसी की सजा मिली है। यह मेरठ के परीक्षितगढ़ का रहने वाला है। जियाउर्रहमान का परिवार भी 4 दशक पहले दिल्ली ओखला में जाकर रहने लगा था। एटीएस ने जियाउर्रहमान को जामिया दिल्ली से पकड़ा था। जियाउर्रमान के पिता अब्दुल रहमान पीडब्यूडी में तैनात थे। रिटायर होने के बाद 1975 में वे परिवार सहित दिल्ली चले गए थे।

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