लखनऊ। कोरोनाकाल (Corona Pandemic) की विषम परिस्थितियों में मोर्चा संभालने वाले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारी बेहद निराश हैं। इसके पीछे की वजह है सरकार की वादाखिलाफी और अनदेखी। अपनी जान को जोखिम में डालकर लोगों की सेवा करने वाले इन स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति सरकार ने जो वादा किया था, वो अभी तक पूरा नहीं हुआ है। इन कर्मचारियों ने कहा कि वित्तीय वर्ष समाप्त हो रहा है लेकिन अधिकारियों को हमारी कोई सुध नहीं है। गौरतलब है कि सरकार ने कोरोना की ड्यूटी कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए प्रोत्साहन धनराशि देने का ऐलान किया था। जो अभी तक नहीं मिला है। इसके अलावा कोरोना की ड्यूटी के दौरान कोविड की वजह से जान गंवाने वाले कर्मियों के आश्रितों को 35 लाख की बीमा राशि दिये जाने का वादा किया गया था लेकिन अभी तक इसको भी पूरा नहीं किया है। एनएचएम के कर्मचारियों ने बताया कि कोरोना की वजह से उनके 35 साथियों ने जान गंवाई थी, जिसमें से मात्र तीन के ही परिजनों को अब तक बीमा राशि मिल पाई है। इसके लिए भी उन्हें लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी।
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इस संबंध में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (National Child Health Program) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ आनन्द प्रताप सिंह ने अपर मुख्य सचिव, महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य व मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से पत्र लिख कर तत्काल प्रभाव से बकाया प्रोत्साहन धनराशि आबंटित कराने की मांग की है। इस अवसर पर प्रदेश प्रवक्ता सुदीप शुक्ला ने बताया कि सरकार द्वारा एएनएम, आशा संगिनियों के साथ 01 मई से 31 जुलाई 2021 तक राजकीय कोविड चिकित्सालयों व जांच केंद्रों पर कार्य किये कर्मियों को मूल वेतन का पचीस प्रतिशत प्रोत्साहन धनराशि के रूप में देने की घोषणा की गई थी, लेकिन वर्तमान वित्तीय वर्ष के अंतिम समय में भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारियों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं हो पाया है। वहीं ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण से अपनी जान गंवाने वाले लगभग 35 शहीद कर्मचारियों के परिजन भी बीमा धनराशि के 50 लाख रकम की राह देख रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष डॉ आनंद प्रताप सिंह ने कोरोना शहीद कर्मचारियों के परिजनों की मार्मिक व्यथा का वर्णन करते हुए सरकार व उच्चाधिकारियों से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है।

