यूपी चुनावी दंगल 2022: जाटलैंड में दांव पर भाजपा की साख, सपा-रालोद-बसपा ने भी लगाया जोर

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यूपी चुनावी दंगल 2022: जाटलैंड में दांव पर भाजपा की साख, सपा-रालोद-बसपा ने भी लगाया जोर

लखनऊ। यूपी चुनावी दंगल 2022 – उत्तर प्रदेश में पहले चरण का मतदान 10 फरवरी को होना है। जिसमें पश्चिमी यूपी कि 58 विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी की साख दांव पर लगी हुई है। क्षेत्र कवि बहुजन समाज पार्टी का गढ़ माना जाता रहा है लेकिन 2014 में भारतीय जनता पार्टी के उभार के बाद यहां पर बसपा समेत सपा और रालोद भी लगातार सिमट दे गए। 2014 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों के बाद भारतीय जनता पार्टी के हिंदुत्व की कार्ड अभी तक कोई विपक्षी दल नहीं पाया है। लेकिन 2022 का विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी की साख का सवाल बनता जा रहा है। जाटों की नाराजगी ने भारतीय जनता पार्टी की चिंता की लकीरें बढ़ा दी हैं। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी के तमाम बड़े नेताओं ने पश्चिमी यूपी के जिलों में खूंटा गाड़ दिया है। किसान आंदोलन से भारतीय जनता पार्टी के लिए जाटों के बीच अपनी नाराजगी को पाटने की कोशिश की जा रही है। जबकि राष्ट्रीय लोक दल को यहां पर बढ़त मिलती हुई दिखाई दे रही है जिसका फायदा समाजवादी पार्टी को भी मिलता हुआ दिख रहा है। वही बहुजन समाज पार्टी भी अपने किले को एक बार फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

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2017 में भाजपा ने कर दिया था सूपड़ा साफ

पश्चिमी यूपी में पहले चरण में 58 सीटों पर मतदान होना है इस पर नजर डालें तो 2017 में भारतीय जनता पार्टी ने 53 सीटों पर विजय पताका फहराई थी। वहीं समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को 2 सीटें मिली थीं जबकि एक सीट राष्ट्रीय लोकदल के खाते में गई थी। 2017 में भारतीय जनता पार्टी को जाटों का एकमुश्त वोट मिला था।

किसानों की शहादत दंगों के दंश पर भारी!

2014 में मुजफ्फरनगर दंगों के बाद मुस्लिम और जाट के बीच एक बड़ी खाई पैदा हो गई थी जिसका सीधा लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिला था। लेकिन पिछले दिनों करीब 1 साल तक चले किसान आंदोलन के बाद दंगों का दंश अब यहां पर काफी हद तक मिटता हुआ दिखाई दे रहा है। किसान आंदोलन के दौरान करीब 700 किसानों ने अपनी जान गवाई थी जिसका दर्द आज भी पश्चिमी यूपी के जिलों में देखने को मिल सकता है। करीब 1 साल तक भाजपा के नेताओं द्वारा किसानों को उल जलूल बोलना भी अब भारी पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। साफ तौर पर देखा जाए तो मुजफ्फरनगर के दंगे का दंश भूलकर जाट किसानों की शहादत को किसी भी शर्त पर बोलने को तैयार नहीं दिखाई दे रहे।

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जाटों को लुभाने की कोशिश

केंद्रीय मंत्री अमित शाह पिछले दिनों चौधरियों की एक पंचायत बुला चुके हैं। लेकिन सूत्रों का दावा है कि इस बैठक में बड़ी संख्या में चौधरियों ने शिरकत नहीं की थी। जो चौधरी आए थे उन्होंने भी अपनी कई मांगे अमित शाह के सामने रखी हैं। गौरतलब है कि 2017 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा नेताओं ने जाटों को आरक्षण दिए जाने का वादा किया था लेकिन आज तक उस पर कोई चर्चा नहीं की गई है। चौधरियों ने यह मुद्दा भाजपा के सामने रखा है। वही अखिलेश यादव भी लगातार जयंत चौधरी के साथ मिलकर पश्चिमी यूपी में लगे हुए हैं। वह चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत और चौधरी चरण सिंह का नाम लेकर जाटों को अपने पाले में लाने की कोशिशों में लगे हुए हैं। इसके पहले वह पश्चिमी यूपी में दो बड़ी रैलियां भी कर चुके हैं।

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