यूपी चुनावी दंगल 2022: अखिलेश का यह दांव बन सकता है सत्ता की गारंटी, सीधे पांच करोड़ के वोटबैंक पर निशाना

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यूपी चुनावी दंगल 2022: अखिलेश का यह दांव बन सकता है सत्ता की गारंटी, सीधे पांच करोड़ के वोटबैंक पर निशाना

लखनऊ। यूपी चुनावी दंगल 2022 – समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने श्रमिकों के लिए एक बड़ा ऐलान किया है। पश्चिमी यूपी में अपने सहयोगी जयंत चौधरी के साथ कार्यकर्ताओं से मिल रहे अखिलेश यादव ने कहा है कि उनकी सरकार बनेगी तो समाजवादी कैंटीन और स्टोर खोले जाएंगे। जहां से ₹10 में भरपेट भोजन और मजदूरों को सस्ता राशन मिलेगा। इसके अलावा अखिलेश ने कहां है कि शहरी क्षेत्र के श्रमिकों के लिए अर्बन एंप्लॉयमेंट गारंटी कानून लाया जाएगा जिससे उनके रोजगार को सुनिश्चित किया जाएगा। अभी कहां है कि रोजगार और नौकरी के लिए मध्यम उद्योग को पैकेज दिया जाएगा जिससे कि नई इकाइयों को शुरू किया जा सके। अखिलेश यादव ने अपने इस बयान से एक बड़े वोट बैंक को साधने की कोशिश की है।

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पांच करोड़ से ज्यादा है श्रमिकों की संख्या

अखिलेश यादव ने श्रमिकों को ध्यान में रखकर यह बड़ा ऐलान किया है। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में कुल पंडित कामगारों की संख्या 5 करोड़ 90 लाख 8 हजार 745 है। ऐसे में जाहिर सी बात है कि अखिलेश यादव का यह ऐलान एक और मास्टर स्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है। सरकार के इस पोर्टल पर पंजीकृत असंगठित कामगारों की संख्या को देखें तो यह तीन करोड़ 81 लाख 7725 और बीओसीडब्ल्यू बोर्ड के अनुसार कुल पंजीकृत कामगारों की संख्या एक करोड़ 27 लाख 48020 है।

योगी सरकार के भरण पोषण भत्ते की काट?

अखिलेश यादव का यह ऐलान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भरण पोषण भत्ते की काट मानी जा रही है। जिसके तहत योगी सरकार करीब डेढ़ करोड़ श्रमिकों को ₹500 भरण पोषण का पत्ता दे रही है। योगी सरकार हर 2 महीने पर भरण-पोषण भत्ता पंजीकृत कामगारों के खातों में भेजती है। ऐसे में अखिलेश यादव का नया ऐलान योगी सरकार के इस काम के काट के रूप में देखा जा रहा है।

कोरोना की मार झेल रहे कामगारों को लुभाने की कोशिश

अखिलेश यादव के इस ऐलान के पीछे यह भी माना जा रहा है कि कोरोना के बाद जीविका के संकट से जूझ रहे कामगारों को लुभाने में मदद मिल सकती है। गौरतलब है कि पहली और दूसरी लहर के दौरान बड़ी संख्या में श्रमिकों के सामने जीविका का संकट खड़ा हुआ था जो अभी तक बना हुआ है। आपको बता दें कि कोरोना काल में देश के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हुआ है। बेरोजगारी के ताजा जारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर महीने में 7.91 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई है जबकि सर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनामी यानी सीएमआईआई के आंकड़े कहते हैं कि अगस्त महीने में बेरोजगारी की दर 8.3% थी। विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सीएमआईआई की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार यूपी में 2016 के मुकाबले 2021 तक बेरोजगारी दर में 7% की गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट की मानें तो 2016 में सितंबर दिसंबर के बीच 38.5% लोग काम कर रहे थे जो 2021 तक आते-आते 32.79% तक रह गए हैं।

यूपी के हालात हैं बुरे

सीएमआईआई के जारी आंकड़ों के मुताबिक यूपी की परिस्थितियों पर नजर डाले तो तो 5 साल पहले 14.95 करोड़ की कामकाजी आबादी में करीब 14% की बढ़ोतरी हुई है और 2021 तक 17.07 करोड़ पहुंच गई है। रिपोर्ट कहती है कि कामकाजी आबादी तो बड़ी है लेकिन रोजगार में 16 लाख की गिरावट आई है। आंकड़ों की माने तो दिसंबर 2016 में यूपी में 1लाख 49 हजार 570 कामकाजी आबादी में से 57 हजार 589 के पास काम था। वर्ष 2021 में 1 लाख 70 हजार 730 कामकाजी आबादी में से काम करने वाले लोगों की संख्या 55 हजार 976 ही रह गई है। इसको एक और आसान भाषा में समझा जाए तो यूपी में दिसंबर 2021 में रोजगार किधर अगर दिसंबर 2016 की तरह रही होती तो इसके अलावा एक करोड़ लोगों के पास आज नौकरी होती है।

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अखिलेश आम आदमी से जुड़े मुद्दों पर कर रहे वार

उत्तर प्रदेश के चुनाव को लेकर के अब तक कि हम परिस्थितियों पर नजर डालें तो अखिलेश यादव लगातार आम आदमी से जुड़े मामलों को लेकर के आक्रामक हैं। अखिलेश लगातार भारतीय जनता पार्टी पर रोजगार, किसानों के मामले, कानून व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल कर रहे हैं। जबकि भारतीय जनता पार्टी की कोशिश है कि इस मुद्दे को राम मंदिर, मथुरा विवाद पर लेकर जाया जाए। लेकिन अभी तक अखिलेश यादव अपने मुद्दे से भटके नहीं हैं।

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