मेरठ। यूपी विधानसभा चुनाव – इस विधानसभा चुनाव में ‘एम’ यानी महिला और कानून व्यवस्था को अपना प्लेकार्ड बनाकर भाजपा कांग्रेस और सपा से आगे निकलती दिखाई दे रही है। महिलाओं की राजनीति को जहां कांग्रेस ने हवा दी तो वहीं सपा अगड़ा बनाम पिछड़ा का तोड़ निकालने में भाजपा कामयाब रही। सपा को जहां कानून व्यवस्था के मुददे पर घेरने की कोशिश की जा रही है वहीं दूसरी ओर कांग्रसे को उसी की काट से घेर लिया है। यानी जिन महिलाओं के सहारे कांग्रेस चुनावी रण जीतने के प्रयास में थी भाजपा ने अपर्णा और अदिति सिंह के अलावा प्रियंका मौर्य को आगे कर तगड़ा जवाब दिया है। भाजपा अब ‘एम’ कार्ड को पूरी तरह से भुनाने में लगी है।
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इसका लाभ भी पार्टी को होता दिख रहा है। भाजपा ने महिला कार्ड के सहारे कांग्रेस की काट निकाल ली है। सपा सरकार में कानून व्यवस्था एक बड़ा मुददा बना था। अपराध के बढ़ते ग्राफ को रोकने में नाकाम रहे तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए यह नासूर बन चुका है। उनके इस जख्म को जब चाहे तब योगी आदित्यनाथ और कोई भी भाजपा प्रवक्ता कुरेद देता है। यह भी सही है कि उनके इस जख्मो को भरने का मलहम तभी मिल सकता है जबकि सपा की सरकार एक बार फिर से आए। इसी कोशिश में सपा रात दिन एक किए हुए हैं।
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विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने महिला सुरक्षा का मुददा क्या उठाया। अब भाजपा ने महिला सुरक्षा के इस मुददे को महिलाओं को आगे कर जवाब देना शुरू कर दिया है। यहीं कारण है कि भाजपा सपा सरकार में महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों को गिना रही है। भाजपा शीर्ष नेतृत्व को यह उम्मीद है कि भाजपा सरकार में बेहतर रही कानून व्यवस्था पर प्रदेश का मतदाता उनको आंख बंदकर वोट करेगा।

