मेरठ। मेरठ कैंट को भाजपा का अभेद गढ़ माना जाता रहा है। पिछले चार चुनाव से यहां पर भाजपा का ही वर्चस्व रहा है। तीन बार से लगातार भाजपा के टिकट पर सत्यप्रकाश अग्रवाल चुनाव जीतते आए हैं। लेकिन इस बार भाजपा ने उनके स्थान पर पेशे से बिल्डर और पूर्व भाजपा विधायक अमित अग्रवाल को मैदान में उतारा है। एक तरह से देखा जाए तो यह माना जा रहा है कि इस बार भी भाजपा का प्रत्याशी ही चुनाव जीतेगा। लेकिन जैसा कि देखने में आ रहा है राह उतनी आसान नहीं है जितनी कि भाजपाई समझ रहे हैं। इस सीट से बसपा ने युवा प्रत्याशी अमित शर्मा को टिकट देकर मैदान में उतारा है।
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अमित शर्मा जहां व्यापारी नेता रहे हैं। वहीं उनकी पैठ महानगर में काफी अच्छी मानी जाती है। इसी के साथ बसपा प्रत्याशी दलित मुस्लिमों को साधने के साथ व्यापारियों को भी अपने पाले में करने के लिए मेहनत कर रहे हैं। पिछले दो चुनाव से भाजपा की जीत का वोट प्रतिशत कैंट में कुछ कम हुआ है। मेरठ की कैंट सीट को व्यापारी बाहुल्य माना जाता है। इस सीट पर पंजाबी मतदाताओं की भी अच्छी खासी तादात है। इस बार पंजाबी समाज के लोग भी भाजपा से टिकट मांग रहे थे। लेकिन भाजपा ने पंजाबी समाज की टिकट बंटाने के दौरान अनदेखी की है। माना जा रहा है कि इससे पंजाबी समाज में भीतर ही भीतर नाराजगी और रोष व्याप्त है। जिसका खामियाजा चुनाव में उठाना पड़ सकता है।
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इस सीट पर दलित और मुस्लिम हमेशा से से भाजपा के खिलाफ वोट करता रहा है। वहीं बसपा प्रत्याशी अमित शर्मा का कहना है कि इस बार कैंट के मतदाताओं को तय करना है कि वे 80 साल के बुजुर्ग को चुनाव जीताएंगे या फिर किसी युवा को कैंट की कमान सौंपने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता पूरे कैंट को टोल फ्री करना है। इस समय कैंट में अवैध टोल लगाकर लोगों से वसूली की जा रही है। पिछले चुनाव में बसपा प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे। 2017 में बसपा ने भाजपा केा कैंट जीतने में पसीना निकलवा दिया था। अगर इस बार भी ऐसा होता है तो निसंदेह कैंट की राह भाजपा के लिए आसान नहीं होगी।

