मेरठ। यूपी विधानसभा चुनाव 2022 – पश्चिमी उप्र में पहले चरण में 11 जिलों की 58 सीटों पर मतदान होना है। मतदान गुरुवार को होगा। इन 58 सीटों में ऐसी बहुत सी सीटें हैं जहां पर बसपा भाजपा और सपा—रालोद गठबंधन का खेल बिग़ाड़ सकती हैं। इनमें कुछ में कांग्रेस प्रत्याशी भी साइलेंट किलर की तरह हैं। इन्हें अभी तक भाजपा और गठबंधन प्रत्याशी कम आंककर चल रहे हैं। लेकिन ये दोनों का खेल बिगाड़ने की कुवत रखते हैं। बसपा ने सोशल इंजीनियरिंग के सहारे कुछ सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।
मुजफ्फरनगर जिले की खतौली विधानसभा में बसपा के करतार भड़ाना मैदान में हैं। करतार ने मुकाबले को पूरी तरह से त्रिकोणीय बना दिया है। यहां से भाजपा के विक्रम सैनी और गठबंधन से राजपाल सैनी में टक्कर है। इसी जिले की बुढ़ाना सीट पर बसपा के प्रत्याशी हाजी अनीस पेच फंसा दिया है। वहीं शामली के चरथावल विधानसभा में मायावती ने बसपा से पूर्व मंत्री सईदुज्जमा के बेटे सलमान सईद भरोसा जताया है। इस सीट पर भी बसपा ने भाजपा और गठबंधन प्रत्याशी को हैरान कर दिया है। मीारपुर विधानसभा से मो. सालिक और गढ़मुक्तेश्वर विधानसभा पर मदन चौहान बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों ने ही मुकाबले को काफी रोमांचक बना दिया है।
मेरठ की सिवालखास सीट पर गठबंधन से पूर्व विधायक गुलाम मोहम्मद चुनाव लड रहे हैं तो दूसरी ओर भाजपा से मनिंदरपाल मैदान में हैं। लेकिन बसपा के नन्हें प्रधान को कम आंकना बड़ी भूल होगी। नन्हें ने मुकाबला त्रिकोणीय कर दिया है। बसपा ने सोशल इंजीनियरिंग के तहत गुर्जर कार्ड का उपयोग सिकंदराबाद सीट पर किया है। यहां से किसान नेता मनवीर गुर्जर को प्रत्याशी बनाया है। आगरा की खेरागढ़ विधानसभा सीट पर बसपा ने कुशवाहा बिरादरी के गंगाधर को टिकट देकर मैदान में उतारा है। जो कि अन्य प्रत्याशियों को तगड़ी चोट दे रहे है। पहले चरण में 20 से अधिक सीटें ऐसी हैं। जहां बसपा की सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले का असर दिखाई दे रहा है। वहीं कांग्रेस भी बसपा की तरह दांव खेलने में पीछे नहीं है। कांग्रेस के पास हारने को तो कुछ है नहीं अगर कुछ आता है तो वो उसके लिए बोनस ही होगा।
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कांग्रेस ने पहले चरण की ऐसी कई सीटों पर पेंच फंसाया हुआ है। मेरठ शहर सीट पर कांग्रेस ने रंजन शर्मा को प्रत्याशी बनाया है। ये सीट ब्राहमण बाहुल्य मानी जाती है। सरधना से भी कांग्रेस ने प्रत्याशी उतारकर गठबंधन प्रत्याशी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मीरापुर विधानसभा सीट पर भी कांग्रेस ने मौलाना जमीन को टिकट देकर बहुत बड़ा दांव खेला है। इसी तरह से मेरठ दक्षिण सीट पर नफीस सैफी केा टिकट देकर कांग्रेस ने सैफी बिरादरी की वोट अपने कब्जे में कर यहां पर भी गठबंधन के लिए परेशानी खड़ी की है।

