ऑक्सीजन पाने को गैस प्लांट पर लग रही लोगों की भीड़
कोरोना काल में भी सामाजिक दूरी का नहीं हो रहा पालन
मेरठ। कोरोना संक्रमण काल में अपनों की उखड़ती सांसों को थामने के लिये महानगर के गैस प्लांटों पर सुबह से ही लोग लाइन में लगकर खड़े हो जाते हैं। घंटों कतार में लगने के बाद उनका नंबर आता है और वह चंद किलो ऑक्सीजन लेकर अपने मरीजों को सांसे दे पाते हैं। मगर कतार में लगे लोगों के बीच सामाजिक दूरी न रखे जाने के कारण उनके कोरोना संक्रमित होने की आशंका बनी हुई है। मगर गैस प्लांट संचालको से लेकर प्रशासन तक का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है। ऐसे में कोरोना संक्रमण फैलने फैलने का खतरा बना हुआ है।
कोविड-19 की दूसरी लहर से जूझ रहे मेरठ महानगर के लोग ऑक्सीजन की कमी का भी सामना कर रहे हैं। दरअसल अस्पतालों में जगह उपलब्ध न होने के कारण लोग कोविड पेशेंट को घर में ही रखकर इलाज कराना बेहतर समझ रहे हैं। वहीं स्वास्थ विभाग भी कम लक्षणों वाले मरीजों को घर में ही आइसोलेशन में रहने की सलाह दे रहा है। लेकिन कोविड मरीज के सामने ऑक्सीजन लेवल डाउन होने की समस्या सामने आ रही है। ऐसे में प्रत्येक कोरोना मरीज के तीमारदार चाहते हैं कि उनके पास ऑक्सीजन सिलेंडर अवश्य हो जिससे आवश्यकता पड़ने पर वह संक्रमित व्यक्ति को ऑक्सीजन का सहारा दे सके।
ऐसे में ऑक्सीजन को लेकर मेरठ में मारामारी मची हुई है। मेरठ के गैस प्लांटों पर सुबह से ही घरों और अस्पतालों में उपचाररत कोरोना मरीज के लिए ऑक्सीजन लेने वालों की लाइन लग जाती है। गैस प्लांट खुलने से पहले ही लोग गेट के बाहर लाइन लगा कर खड़े हो जाते हैं। ऑक्सीजन पाने के लिये कई बार सुबह से लेकर शाम तक कतार में लगना पड़ता है। मगर गैस प्लांटों के बाहर जुट रही भीड़ के बीच सामाजिक दूरी का पालन कराने की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है जिससे कोरोना संक्रमण और फैलने की आशंका बन रही है।

गौरतलब है कि गैस प्लांटों पर सिलेंडर लेकर पहुंचने वाले सभी लोग किसी न किसी कोविड मरीज के लिये ही ऑक्सीजन लेने के लिये आते हैं। जाहिर है कि वह कोरोना मरीज के संपर्क में भी आते होंगे जिससे उनके संक्रमित होने की संभावना रहती है। अगर चंद लोग भी कोरोना संक्रमित हुए तो उनके घंटों तक और लोगों से लगभग सट कर खड़े होने या बैठने के कारण कोरोना फैलने की आशंका होना बेमानी नहीं है। गौरतलब है कि मेरठ के गैस प्लांटों पर लोगों की इतनी भीड़ है कि सभी एक-दूसरे से सट कर खड़े हो रहे हैं। घंटों इंतजार करने वाले लोगऑक्सीजन सिलेंडर पर ही सो भी जाते हैं। अनेक जगहों पर तो ऑक्सीजन सिलेंडर लेने के लिये मारपीट होने के मामले भी सामने आये हैं। ऐसे में इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि अपनो की उखड़ती सांसे थामने के लिये ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर घर से निकले लोग कोरोना संक्रमित होकर वापस आयें।
प्रशासन को चाहिये कि वह ऑक्सीजन सिलेंडर लेने आये लोगों के बीच सामाजिक दूरी बनाने के लिये गैस प्लांटों को उसी प्रकार गोले बनाने के लिये कहे जैसे की दुकानों के बाहर बनाये जाते हैं। ऑक्सीजन सिलेंडर लेने के लिये ऑनलाइन आवेदन का ऑप्शन भी दिया जा सकता है ताकि जरूरतमंद अपने निर्धारित समय पर ही गैस प्लांट पर पहुंचे और उसको भीड़ में शामिल न होना पड़़े। ऑक्सीजन सिलेंडर की होम डिलीवरी भी बेहतर विकल्प हो सकता है और इससे जरूरतमंद को ही ऑक्सीजन दिये जाने की व्यवस्था भी हो सकती है। क्योंकि देखने में यह भी आ रहा है कि अनेक लोग ऐसे भी हैं जिन्हें फिलहाल ऑक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता नहीं है मगर उन्होंने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बेवजह अपने घर में ऑक्सीजन सिलेंडर रखा हुआ है। यही कारण है कि जरूरतमंद लोेगों से लेकर हाॅस्पिटलों को भी ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं और लोगों की जान पर बनी हुई है।

