ठंड के मौसम में छोटे बच्चों को सर्दी से बचाने के लिए दो बूंद ब्रांडी या रम देने का नुस्खा बरसों से घर घर में प्रचलित है। बच्चों को जरा सी खांसी – जुकाम होने पर डॉक्टर के पास जाने की बजाए दादी-नानी नई मांओ को भी इस नुस्खे के बारे में खूब बताती हैं। भारतीय घरों में गर्म पानी के साथ कुछ बूंद रम या एक ढक्कन ब्रांडी पिलाने का फार्मूला बिल्कुल आम है।
लेकिन यह इतना सही है इस पर चिकित्सकों की अलग ही राय है। पीडियाट्रिशियन इसे बिल्कुल सही नहीं मानते हैं। उनके मुताबिक यदि बच्चों को अल्कोहल की एक बूंद भी पिलाई जाए तो उनके दिमाग का विकास प्रभावित हो सकता है। चिकित्सक यहां तक कहते हैं कि यदि बच्चों के शरीर पर अल्कोहल मला जाता है तो भी यह उनके लिए बहुत नुकसानदायक है। इससे न केवल बच्चों के विकास में बाधा उत्पन्न होती है बल्कि उनका आंतरिक विकास भी रुक सकता है।
हाल ही में पीडियाट्रिशियन सुशांता पाई चौहान ने बहुत ही आसान तरीके से बच्चों को ब्रांडी या रम देने के नुकसान के बारे में समझाया। अपने इंस्टाग्राम पर उन्होंने एक वीडियो पोस्ट किया है। इसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों के साथ इस तरह के के नुस्खे का प्रयोग उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। चिकित्सा बताती है कि रम में 70 फीसदी तक अल्कोहल की मात्रा होती है। जबकि ब्रांडी में भी 60 फ़ीसदी तक अल्कोहल मिलती है। यदि इसकी एक बूंद भी बच्चों को दी जा रही है तो यह उनके लिए नुकसानदायक है।
इसके दुष्प्रभावों के बारे में भी उन्होंने स्पष्ट किया है उनके मुताबिक बच्चों को दी जा रही एक बूंद भी उसके मस्तिष्क के विकास को रोक सकता है। बच्चों के सीखने समझने की प्रक्रिया न केवल रुक जाएगी बल्कि उसे छोटी-छोटी बातें समझने में भी परेशानी होने लगेगी। इससे बच्चों के मोटर स्किल्स भी प्रभावित हो सकते हैं। उनका सामाजिक विकास अवरूद्ध हो सकता है। यहां तक की बच्चों को शराब की लत भी लग सकती है।
वहीं अन्य चिकित्सक बताते हैं कि शराब की जरा सी मात्रा भी लिवर को नुकसान पहुंचाने के लिए काफी है। छोटे बच्चों का लिवर कमजोर होता है। जरा सा अल्कोहल अब्जॉर्ब करने में उसे बहुत कठिनाई होती है। इससे बच्चों के शरीर में टॉक्सिन पैदा होने शुरू हो जाते हैं और उसके अंदर बीमारियां पनपने लगती है। साथ ही लीवर जल्दी खराब भी हो सकता है। यही नहीं अल्कोहल का असर बच्चों की हड्डियों को भी कमजोर बनाता है।
चिकित्सक बताते हैं कि बच्चों को यदि ब्रांडी या रम की कुछ बंदे भी दी जा रही है, तो उन्हें एसिडियोसिस नाम की बीमारी हो सकती है। जिससे बच्चे के पेट और शरीर का पीएच लेवल बिगड़ जाता है। उनके खून में अम्ल की मात्रा बढ़ने लगती है। जिससे कई अन्य गम्भीर बीमारियां हो सकती है।
यदि आप भी अपने बच्चों को ठंड के असर से बचाने के लिए ब्रांडी या रम दे रहे हैं तो सतर्क हो जाइए आपके इस एक नुस्खे से मासूम बच्चे की सेहत का समीकरण बिगड़ भी सकता है।
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