देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत धामी सरकार के गैरसैण को लेकर किये जा रहे व्यवहार को लेकर खासे चिंतित दिखाई दे रहे है. शायद यही वजह है त्रिवेंद्र सिंह रावत ने धामी सरकार से गैरसैण को लेकर सवाल किया है. त्रिवेंद्र ने उनके कार्यकाल में घोषित की गई पच्चीस हजार करोड़ की योजना का क्या हुआ. यही नहीं त्रिवेंद्र ने गैरसैण के लिए मास्टर प्लान तैयार करने को लेकर एक कमेटी के गठन का भी एलान किया था जिसको लेकर अभी तक कोई शासनादेश जारी नहीं किया गया है. दरअसल त्रिवेंद्र सरकार ने ही गैरसैण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया था. जिसके विकास के लिए 25 हजार करोड़ की योजना और मास्टर प्लान के लिए कमेटी बनाने का एलान भी किया था. त्रिवेंद्र कुर्सी से क्या हटे कि नई सरकार के नए मुखिया के लिए गैरसैण पूरी तरह से गैर होने लगी.
Read also: Char Dham Yatra 2022: चारधाम यात्रा पर आए छह श्रद्धालुओं की हार्ट अटैक से मौत
कँहा गई गैरसैण की 25 हजार की योजना ?
2022 के विधानसभा चुनाव में पहली बार ऐसा हुआ कि गैरसैण को लेकर किसी भी दल ने कोई दावा नहीं किया और न ही किसी चुनावी रैली और नेता जी के बयानो में गैरसैण सुनाई दी हो. अब तो आलम यह है की गैरसैण को लेकर सरकार गैरसैण के लिए काम करना तो दूर उसके लिए घोषित पहले की योजनाओ को भी भूलती जा रही है.जिसका कस्ट शायद हर उस पहाड़ प्रेमी को होगा जिसने उत्तराखंड की परिकल्पना में गैरसैण को देखा हो. अब तो दुःख उस समय के मुख्यमंत्री और सत्ताधारी दल के ही त्रिवेंद्र सिंह रावत कोभी सत्ता रहा है. हाल ही में उनका यह दर्द एक समाचार एजेंसी को दिए गए इंटरव्यू में दिखाई दिया. जिसमे उन्होंने गैरसैण के लिए उनके द्वारा घोषित की गई 25 हजार की योजना के बारे में पूछा. उन्होंने कहा की इस योजना से गैरसैण में ई विधानसभा,सचिवालय,जिला हॉस्पिटल ,पानी की आपूर्ति, गैरसैण से कर्णप्रयाग, द्वारहाट और बागेश्वर की सड़क को डबल लेन किया जाना था.वे इस बजट में इसको लेकर कोई राशि न दिए जाने से आहत है.
Read also: Chardham Weather Update: चारधाम में बर्फबार से बढ़ी ठंड, कई जिलों में रात से मुसलाधार बारिश
गैरसैण मास्टरप्लान का पता नहीं
25 हजार करोड़ की योजना के लिए धन ही नहीं, गैरसैण के लिए मास्टर प्लान हेतू एक कमेटी का गठन भी नए राज में खो सा गया है. जिसमे आईएएस,आईपीएस,आईएफएससहित टाउन प्लानर को शामिल किया जाना था. लेकिन सत्ता के गलियारों में हवाओं के बदले हुए रुख में इस कमेटी की घोषणा पर धूल जमती नजर आ रही है शायद यही वजह है की अब तक इसको लेकर कोई जिओ जारी नहीं हो पाया है.

