देहरादून: देहरादून के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बने तीन महीने हो चुके हैं और संविधान के अनुसार उन्हें सीएम पद पर बने रहने के लिए विधायक या एमएलसी के रूप में चुना जाना ज़रूरी है. इसीलिए अब यह उनके चुनाव लड़ने को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि वह किस सीट से उपचुनाव लड़ेंगे। सियासी गलियारों में चल रही इन सारी बहसों पर मुख्यमंत्री तीरथ रावत का बयान सामने आ गया है.
पार्टी तय करेगी, हम पालन करेंगे
तीरथ सिंह रावत ने कहा कि वह उपचुनाव किस सीट से लड़ेंगे, यह फैसला भारतीय जनता पार्टी के आलाकमान के हाथों में है. उन्होंने पार्टी के प्रति इस बात के लिए भी आभार जताया कि कठिन समय के दौरान पार्टी ने सीएम पद की जिम्मेदारी के लिए उनका चयन किया. इस मामले में चर्चा छिड़ने के बाद रावत ने कहा कि ‘मैं इस बारे में फैसला नहीं करूंगा, पार्टी करेगी. दिल्ली तय करेगी कि मुझे कहां से चुनाव लड़ना है और मैं आदेश का पालन करूंगा.’
क्या है पूरा मामला
दरअसल इस बात को लेकर चर्चा तब शुरू हुई थी, जब पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे नवप्रभात ने यह दावा किया था कि अगले साल मार्च में विधानसभा चुनाव हैं, तो एक साल से भी कम समय में होने के चलते राज्य में उपचुनाव नहीं करवाए जा सकते. ऐसे में उन्होंने रावत के सीएम पद पर बने रहने पर ‘संवैधानिक संकट’ शब्द का प्रयोग किया था. दूसरी तरफ विशेषज्ञों के अनुसार चुनाव आयोग उपचुनाव का फैसला ऐसे में भी कर सकता है, जबकि राज्य में विधानसभा चुनावों को लेकर साल भर से भी कम समय बचा हो. गौरतलब है कि रावत को 9 सितंबर तक विधायक के रूप में चुना हुआ जनप्रतिनिधि होना होगा, तभी वह संवैधानिक रूप से सीएम पद पर बने रह सकेंगे.

