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भट्टी बन गया देश, संभलो नहीं तो…

आर्टिकल/इंटरव्यूभट्टी बन गया देश, संभलो नहीं तो...

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अमित बिश्नोई
मानसून आने से पहले देश भट्टी बना हुआ है, दिल्ली में दिल दहलाने वाली गर्मी पड़ रही. पहाड़ भी इस बार उबल रहे हैं, सैलानी जो मैदानी इलाकों की गर्मी से निजात पाने के लिए पहाड़ों की ओर भागते थे और वहां जाकर प्रदूषण फैलाने में पूरा सहयोग करते थे, इस बार उन्हें वहां भी निजात नहीं मिल रही है, सूर्य देवता ने इसबार उनका वैकेशन सत्यानाश कर दिया है, हालाँकि बड़ा सवाल ये है कि इसमें सूर्यदेवता की गलती है या फिर इंसानों की जो लगातार अपने फायदे के लिए कुदरत के साथ खिलवाड़ करते जा रहे हैं. हीट स्ट्रोक के मामलों में बड़ा इज़ाफ़ा हुआ है. दिन तो छोड़िये रातों को बाहर निकलना मुश्किल हो गया है , कल ही दिल्ली में सबसे गर्म रात रिकॉर्ड की गयी.

पुलिस वाले ड्यूटी करते हुए बेहोश हो रहे हैं, जान भी गँवा रहे हैं, संवेदनहीनता तो देखिये ऐसे मौके पर भी उसी के साथी उसे बचाने के बजाय, उसे अस्पताल ले जाने के बजाय उसकी वीडियो बना रहे हैं. राजस्थान को छोड़िये, मैदानी क्षेत्रों में इस समय पारा 45 से 47 डिग्री चल रहा है, ये वो तापमान है जिसमें जीवन रुक जाता है, शरीर निढाल हो जाता है, सिर्फ तीन डिग्री और होने पर मौत का खतरा मडराने लगता है, तभी तो जब कुछ जगहों पर पारा 50+ दर्ज हुआ तो मौसम विभाग में हड़कंप मच गया, जांच हुई तो पता चला कि मशीन ही खराब थी.

बात उत्तर प्रदेश की करें तो लू चल रही है और हू का आलम (सन्नाटा) सड़कों पर है, जो सड़कों पर चल रहे हैं उनकी मजबूरिया हैं, नौकरी की मजबूरी, पेट पालने की मजबूरी और यही मजबूरी उनकी मौत की वजह भी बन रही है, पिछले 15 दिनों में गर्मी से 100 से ज़्यादा लोगों की लू लगने से मौत हो चुकी है और इनमें ज़्यादातर मज़दूर पेशा लोग थे जो रोज़ की कमाई पर ज़िंदा थे क्योंकि पांच किलो राशन के अलावा परिवार की और भी बहुत ज़रूरतें होती हैं. ग्लोबल वार्मिंग अब चर्चा का विषय बनने लगी है, लोगों को थोड़ा थोड़ा एहसास हो रहा है कि वो गलती कर रहे हैं, उन्हें सुधरने की ज़रुरत है, उन्हें पानी बचाने की ज़रुरत है, उन्हें पेड़ लगाने की ज़रुरत है. सोचना पड़ेगा, करना भी पड़ेगा. नहीं करेंगे तो भोगेंगे, भुगतेंगे। कब तक ac में बैठेंगे, वो भी साथ छोड़ने लगे हैं, फटने लगे हैं, पिछले दिनों दर्जनों वारदातें आगज़नी की हुई हैं जिनकी वजह AC के कम्प्रेसर में धमाके थे.

अब फेसबुक पर सिर्फ ज्ञान बांटने से कुछ नहीं होगा, फेसबुक से बाहर निकलना होगा, जो ज्ञान दूसरों को बाँट रहे हो उस पर अमल करना होगा वरना हो सकता है अगले साल गर्मी पर ज्ञान बांटने के लिए मौजूद ही न रहो, कोई हीट स्ट्रोक तुम्हारी जीवन लीला का अंत कर दे. अपने बच्चों के लिए तुम्हें दुनिया बचाना है तो कुदरत से खिलवाड़ बंद करना होगा, वरना साल दर साल सभी को लगेगा कि सूरज और नीचे आ गया है. आज कोई वीडियो पोस्ट करता है कि उसने कैसे कार के बोनट पर रोटी सेंकी, कोई रील बनाता है कि कैसे उसने रेत पर पापड़ सेंका। लेकिन सवाल ये उठता है कि ये नौबत क्यों आ रही है और ये नौबत लाने वाला कौन है. कहीं से वीडियो आती है कि कुंए में उतरकर महिलांए उसके कीचड से पानी जमा कर रही हैं और ये घटना किसी रेगिस्तानी इलाके की नहीं, मैदानी इलाके की है. पानी की सही कीमत क्या है, ये कुंएं में उतरने वाली महिलाऐं ही बता सकती हैं. दिल्ली में आजकल क्या हो रहा है, किस तरह पानी के टैंकरों पर भीड़ टूट पड़ती है, पानी की कीमत अब इन्हें भी मालूम हुई होगी।

जहाँ पानी है वहां आज उसकी बर्बादी हो रही है जैसे कभी दिल्ली और बंगलुरु में होती होगी लेकिन पानी को बर्बाद करने वाले ये धनी शहर आज पानी की कीमत क्या है अच्छी तरह जान गए हैं, इसलिए चेतावनी है देश के उन हिस्सों में रहने वालों के लिए जहाँ पानी आज भी आसानी से उपलब्ध हो जाता है, जहाँ आज भी लोगों को अपने घर के बाहर की सड़क को रोज़ाना पानी से धोते हुए देखा जा सकता है, पानी की बर्बादी बंद करो वरना दिल्ली और बंगलुरु जैसा तुम्हारा भी हाल होगा।

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