बदलेगा सत्ता का पता: गोमती नगर में बनेगा यूपी का मेगा विधानसभा कॉम्प्लेक्स

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98 साल पुराने विधानसभा भवन की जगह लेगा हाईटेक और भव्य परिसर
सहारा सिटी की 245 एकड़ जमीन पर तैयार होगा ‘उत्तर प्रदेश का सेंट्रल विस्टा’

उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र आने वाले समय में हजरतगंज से गोमती नगर शिफ्ट होता दिखाई देगा। राजधानी लखनऊ में राज्य सरकार नए और अत्याधुनिक विधानसभा भवन कॉम्प्लेक्स की तैयारी में जुट गई है। यह विशाल परियोजना गोमती नगर के विपुल खंड स्थित उस जमीन पर विकसित होगी, जिसे कभी सहारा इंडिया ग्रुप को लीज पर दिया गया था। अब यह जमीन दोबारा सरकारी नियंत्रण में आने के बाद सत्ता के नए केंद्र के रूप में विकसित की जाएगी।

लखनऊ विकास प्राधिकरण ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाते हुए कंसल्टेंट और आर्किटेक्ट चयन के लिए टेंडर जारी कर दिया है। आरएफपी के अनुसार इच्छुक कंपनियां 21 जून तक आवेदन कर सकेंगी। चयनित एजेंसी परियोजना की डिजाइन, मास्टर प्लान और डीपीआर तैयार करेगी। इसके बाद निर्माण लागत और समयसीमा तय की जाएगी।

बताया जा रहा है कि नया विधानसभा परिसर दिल्ली के सेंट्रल विस्टा की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। यहां विधानसभा और विधान परिषद भवन के अलावा मुख्यमंत्री कार्यालय, मंत्रियों और विधायकों के चैंबर, सचिवालय कार्यालय और मुख्यमंत्री आवास तक एकीकृत रूप में बनाए जाएंगे। पूरा परिसर आधुनिक सुविधाओं और हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था से लैस होगा।

हजरतगंज स्थित मौजूदा विधानसभा भवन का इतिहास लगभग एक सदी पुराना है। इसका उद्घाटन 21 फरवरी 1928 को हुआ था। यह इमारत ब्रिटिश शासन से लेकर आजाद भारत तक उत्तर प्रदेश की राजनीति के हर बड़े दौर की गवाह रही है। माना जा रहा है कि नया भवन तैयार होने तक यह ऐतिहासिक इमारत अपने 100 वर्ष पूरे कर चुकी होगी।

सूत्रों के मुताबिक नया कॉम्प्लेक्स करीब 245 एकड़ क्षेत्र में विकसित होगा। इसमें 170 एकड़ जमीन नगर निगम और 75 एकड़ एलडीए की है। यह जमीन वर्ष 1994 में सहारा इंडिया ग्रुप को डेवलपमेंट के लिए लीज पर दी गई थी, लेकिन शर्तों के उल्लंघन और कथित दुरुपयोग के आरोपों के बाद 2025 में इसकी लीज रद्द कर दी गई।

नए विधानसभा भवन की जरूरत भविष्य की राजनीति और बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए महसूस की जा रही है। महिलाओं को आरक्षण और संभावित परिसीमन के बाद विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ सकती है। ऐसे में मौजूदा भवन की क्षमता सीमित मानी जा रही है। यही वजह है कि सरकार अब भविष्य की जरूरतों के हिसाब से नया सत्ता परिसर तैयार करने जा रही है।

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