पिता से मिली संगीत की विरासत को दीं नई ऊंचाइयां

बॉलीवुडपिता से मिली संगीत की विरासत को दीं नई ऊंचाइयां

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सगीतकार राजेश रोशन-24 मई जन्मदिन विषेश

अपने दौर के बेहतरीन हास्य कलाकार महमूद फिल्म बना रहे थे कुंवारा बाप। उस फिल्म में एक गाना था ‘सज रही गली तेरी’। इस गाने की धुन बनाने के लिए उन्हें तलाश थी संगीतकार की। किसी ने उन्हें राजेश रोशन का नाम बताया। फिल्म संगीत की दुनिया में यह नाम उस वक्त बिल्कुल नया था। लेकिन महमूद ने राजेश रोशन को बुलाकर गाना दिया। राजेश रोशन ने इस गाने की ऐसी धुन बनाई कि महमूद ने राजेश रोशन को गले से लगा लिया। इस गाने को राजेश ने 15 किन्नरों के साथ रिकॉर्ड किया। इस फिल्म के बाद से राजेश रोशन को पीछे मुड़ कर नहीं देखना पड़ा। 24 मई को संगीतकार राजेश रोशन का जन्मदिन है, इस अवसर पर उनके बारे में जानते हैं कुछ दिलचस्प बातें।

जूली के संगीत ने मचा दी थी धूम

24 मई 1955 को जन्मे राजेश रोशन सुप्रसिद्ध संगतकार रौशनलाल नागरथ के सुपुत्र हैं। उनक बड़े भाई राकेश रोशन प्रसिद्ध अभिनेता और निर्माता हैं। ऋतिक रोशन इनके भतीजे है। सन 1975 से अपना कैरियर शुरू करने वाले राजेश रौशन ने लगभग सभी बड़े निर्देशकों के साथ काम कर लिया है। 70-80 के दशक में जब संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारे लाल, आर. डी. बर्मन और कल्याण जी आनंदी जी जैसी जोड़ियों का बोलबाला था, उस दौर में एक नए संगीतकार ने बॉलीवुड में एंट्री की थी। संगीत की दुनिया में कदम रखते ही उन्होंने अपनी मंत्र मुग्ध कर देने वाली धुनों से न सिर्फ़ दर्शकों का दिल जीता, बल्कि इंडस्ट्री में भी अपनी एक अलग पहचान बनाई। राजेश रोशन पहले ऐसे संगीतकार हैं जिन्होंने डेब्यू के साथ ही चार सुपरहिट फिल्में दी। कुंआरा बाप के बाद रिलीज हुईं ये फिल्में हैं, देश परदेस, मनपसंद और लूटमार। राजेश पिछले 5 दशकों से इंडस्ट्री में सक्रीय हैं। इस बीच राजेश रोशन ने ‘कर्ज़’, ‘कोयला’, ‘जूली’, ‘करन-अर्जुन’, ‘पापा कहते हैं’, ‘कहो ना प्यार है’, ‘कृष’, ‘काब़िल’ जैसी सैंकड़ों फ़िल्मों में बतौर म्यूज़िक डायरेक्टर काम किया।फ़िल्मों में बेहतरीन संगीत देने के लिए उन्हें दो बार फ़िल्म फ़ेयर के बेस्ट म्यूज़िक डायरेक्टर के अवॉर्ड से भी सम्मानित जा चुका है।

बदल लिया था सरनेम

यूं तो उनके पिता रोशन लाल नागरथ भी एक जाने-माने संगीतकार थे, मगर राजेश रोशन बचपन में संगीतकार नहीं, बल्कि एक सरकारी नौकरी करना चाहते थे। लेकिन पिता के देहांत के बाद उन्होंने संगीत में रूची लेना शुरू कर दी। राजेश रोशन की पहली गुरू उनकी मां इरा रोशन थीं। पिता की मौत के बाद उनके परिवार वालों ने अपने नाम के पीछे नागरथ सरनेम लगाना छोड़ दिया। उन्होंने अपने पिता को याद रखने के लिए उनके ही नाम को अपना सरनेम बना लिया। बचपन में ही सिर से पिता का साया उठ जाने से राजेश की दुनिया उनकी मां तक ही सीमित रही। राजेश ने संगीत की प्राथमिक शिक्षा अपनी मां इरा रोशन से प्राप्त की। फैज अहमद खान के साथ संगीत रिहर्सल करते हुए इनकी मां इरा रोशन इन्हें भी संगीत की बारीकियां सिखाया करती। इसके बाद में इन्होंने हिंदी संगीत की मशहूर जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल से भी संगीत प्रशिक्षण लिया।

अमिताभ बच्चन ने गाया था पहली बार गाना

सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने करियर का अपना पहला गाना राजेश रोशन के ही संगीत पर गाया। ये गाना है फिल्म नटवरलाल में अमिताभ पर ही फिल्माया गया गाना, मेरे पास आओ मेरे दोस्तों एक किस्सा सुनो। इस गाने को याद कर राजेश बताते हैं, ‘फिल्म नटवरलाल की शूटिंग के दौरान अमित जी ने मुझे बुलाकर रिहर्सल के लिए कहा, लेकिन उस दिन ये गाना फिल्म के निर्देशक को अच्छा नही लगा। फिर अगले दिन यह गाना बिना किसी रिहर्सल के रिकॉर्ड किया गया। राजेश और राकेश रोशन दोनों भाइयों की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा में कई सुपरहिट फिल्में दी हैं। ‘ राजेश रोशन, राकेश रोशन और ऋतिक रोशन ने कहो ना प्यार है, कोई मिल गया, कृष, ‘कृष 3’ और ‘काबिल’ जैसी फिल्मों में साथ काम किया है।

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