नई दिल्ली। मोबाइल में 5जी नेटवर्क के लिए 4जी की तुलना में अधिक भुगतान करना होगा। उसके बाद 5जी का मजा मिल सकेगा। इसके बाद ही लोग अल्ट्रा हाई स्पीड इंटरनेट का मजा ले सकेंगे। 5जी सर्विस को रोलआउट करना 5जी मोबाइल सर्विस की लॉन्चिंग इतनी आसान नहीं है। इसमें करोड़ों रुपये का खर्च है। जिसके लिए टेलीकॉम कंपनियां दिन-रात माथापच्ची करने में लगी हैं।
5जी सर्विस को शुरू करने के लिए मोबाइल कंपनियां अपने टैरिफ में 25से 30 फीसद की बढ़ोतरी कर सकती हैं। इससे पहले पिछली बढ़ोतरी नवंबर 2021 में हुई थी। अब लगभग साल भर पूरा होने को है जिससे टैरिफ बढ़ोतरी की संभावना अब बढ़ गई है। कई महीनों से मोबाइल कंपनियां अपना घाटा पाटने और 5जी सर्विस को शुरू करने के लिए टैरिफ बढ़ा सकती हैं। तर्क दिया जा रहा है कि पूरी दुनिया में मोबाइल टैरिफ भारत में सबसे सस्ता है जबकि उपयोग में भारत ने अच्छे-अच्छे देशों को पीछे छोड़ा है।
5 जी रोलआउट में हो रही देरी
टेलीकॉम कंपनियों ने 5G सर्विस का रोलआउट शुरू कर दिया। कई शहरों में दिवाली से पहले इसका ट्रायल लॉन्च हो गया है। देश के 8 शहरों में यह सेवा अभी शुरू है। हालांकि सबको सुविधा नहीं मिल रही बल्कि चुनिंदा ग्राहक ही इसका लाभ उठा रहे हैं। देश में 5जी सर्विस शुरू होने जा रही है। जिस पर करोड़ों रुपये का खर्च तय है। इसके लिए कंपनियों ने लोन भी लिया। इससे निवेशकों से पैसे लिए हैं। माना जा रहा है कि 5जी सर्विस शुरू करने के लिए कंपनियों को 1.5 से 2 लाख करोड़ का निवेश करना होगा। यह काम बिना किसी लोन, निवेश और टैरिफ प्लान में बढ़ोत्तरी के संभव नहीं है।
फिच रेटिंग की रिपोर्ट कह रही कुछ अलग
फिच रेटिंग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मोबाइल कंपनियां टैरिफ में 15 से 20 परसेंट की बढ़ोतरी कर सकती हैं। इसके अलावा, जेएम फाइनेंशियल ने कहा कि टेलीकॉम कंपनियां दो से तीन किस्तों में दरें बढ़ाने की तैयारी में हैं। जिससे ग्राहकों पर एकमुश्त बोझ न पड़े। बोझ पड़ने से ग्राहक इधर-उधर भाग सकते हैं। हाल के दिनों के बयानों पर गौर करें तो पता चलेगा कि हर टेलीकॉम कंपनी टैरिफ बढ़ाने के पक्ष में मन बना चुकी है।
ARPU बढ़ाने पर जोर
हाल में Vodafone-idea के सीईओ ने दरें बढ़ाने की सिफारिश की थी। कंपनी भारी घाटे से गुजर रही है। लिहाजा इसके पास दरें बढ़ाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है। कंपनी पर करोड़ों रुपये का लोन है। जिसकी भरपाई करने पर 5जी सर्विस की शुरुआत होगी। कंपनियां पोस्टपेड प्लान पर भी 20 प्रतिशत दरें बढ़ सकती हैं।

