महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से मौजूदा महायुति के घटकों के बीच कलह की खबरें लगातार आ रही हैं, लेकिन शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत के ताजा बयान ने सीएम देवेंद्र फडणवीस और डीसीएम एकनाथ शिंदे के बीच कलह की बातों को और बल दिया है।
संजय राउत ने शिवसेना के एक विधायक के हवाले से सामना में लिखा कि एकनाथ शिंदे फडणवीस से नाराज हैं और कोपभवन की अवस्था में चले गए हैं। विधायक ने राउत को बताया कि अमित शाह ने शिंदे को आश्वासन दिया था कि चुनाव उनके नेतृत्व में लड़े जाएंगे और उन्हें सीएम बनाया जाएगा, लेकिन शिंदे के भारी खर्च के बावजूद ऐसा नहीं हुआ। राउत के अनुसार, विधायक ने उन्हें बताया कि शिंदे को संदेह है कि केंद्रीय एजेंसियां उनके फोन टैप कर रही हैं। उन्होंने लिखा कि फडणवीस शिंदे की सीएम बनने की महत्वाकांक्षा से असुरक्षित हैं और उन्होंने अजित पवार से नजदीकी बढ़ा ली है, जो डीसीएम की कुर्सी से संतुष्ट हैं। राउत के विचार में, शिंदे के अधिकांश विधायक फडणवीस के प्रति वफादार हैं और भाजपा में शामिल होकर सीधे उनके नेतृत्व को स्वीकार करने की योजना बना रहे हैं।
राउत आगे लिखते हैं कि शिवसेना नेताओं का एक वर्ग भी “घर वापसी” के पक्ष में है, लेकिन केंद्रीय एजेंसियों द्वारा मुकदमा चलाए जाने के डर से इसे स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं कर रहा है। राउत के बयान के सन्दर्भ में महायुति सरकार में मंत्री शिरशात का यह कहना बड़ा महत्वपूर्ण है, उन्होंने कहा था कि शिवसेना के दोनों गुटों के एकजुट होने का समय आ गया है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पार्टी विभाजित हो गई। शिरशात ने एकीकरण वार्ता के लिए एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे को मेज पर लाने की पेशकश की।
एकनाथ शिंदे ने हालांकि उनके बयान को मीडिया द्वारा गलत तरीके से पेश किया गया बयान बताकर खारिज कर दिया, लेकिन इसने महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। महायुति के चुनाव जीतने के बाद से कई घटनाक्रमों ने दोनों प्रतिद्वंद्वी दलों के राउत और शिरशात द्वारा कही गई बातों को बल दिया है। सबसे पहले शिंदे को सीएम की कुर्सी से वंचित किया गया, फिर गृह विभाग, उसके बाद नासिक और रायगढ़ में संरक्षक मंत्री के पद से वंचित किया गया, जिससे उनके खेमे को यह विश्वास हो गया कि शिंदे को गठबंधन में उचित व्यवहार नहीं मिला है। इसके अलावा, फडणवीस ने शिंदे के सीएम कार्यकाल के दौरान लिए गए कुछ फैसलों को पलट दिया है या उन पर जांच बैठा दी है, जिससे स्थिति और बिगड़ गई है। इस कटुता में सबसे ताजा इजाफा भाजपा मंत्री गणेश नाइक द्वारा ठाणे में जनता दरबार लगाना है, जो शिंदे का गढ़ है।

