रामचरित मानस पर अपने बयान को लेकर सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य डटे हुए हैं, आज उन्होंने एक बार फिर मनुस्मृति समेत दूसरे धार्मिक ग्रंथों और साहित्यों से विवादित अंश हटाने या फिर उन्हें पूरी तरह प्रतिबंधित करने की मांग की है। बजट सत्र में भाग लेने पहुंचे स्वामी प्रसाद मौर्य ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जब तक इस तरह के साहित्यों को प्रतिबंधित नहीं किया जाएगा तब तक जाति और वर्ण व्यवस्था का खात्मा नहीं हो सकता।
मोहन भागवत से निवेदन
पत्रकारों के सवालों के जवाब में सपा नेता ने कहा कि आज मैंने संघ प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का जवाब दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि देशभर में जातिवाद खत्म करने की कोशिश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने तो केवल इतना ही निवेदन किया कि भागवत जी, अगर सच में जाति व्यवस्था खत्म करना चाहते हैं तो जाति और वर्ण व्यवस्था की जननी मनुस्मृति और उसकी तरह के अन्य तमाम ग्रंथ और साहित्य को पहले प्रतिबंधित कराइये तब कहीं जाकर जाति व्यवस्था खत्म होगी अन्यथा नहीं होगी।
भागवत की बात का समर्थन
धर्म के बारे में बयानबाज़ी से दूर रहने के पार्टी के निर्देश पर सपा नेता ने कहा कि हमने तो धर्म की कोई बात नहीं की। हमने तो मोहन भागवत और उनके बयान की बात पर अपना वक्तव्य दिया है. बता दें कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि जाति या वर्ण व्यवस्था भगवान ने नहीं बनाई थी, ये तो पंडितों ने बनाई है। स्वामी प्रसाद ने कहा कि हमारा भी यही मानना है और हम इसे खत्म करने की बात कर रहे हैं। हमारी मांग है कि जहां से वर्ण व्यवस्था चली, जाति व्यवस्था पैदा हुई, उस मनुस्मृति और उसके जैसे दूसरे साहित्य या ग्रंथ जो जाति व्यवस्था के पोषक है उन्हें प्रतिबंधित किया जाय.

