ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में महिला अधिकारिता एवं बाल विकास विभाग, देहरादून द्वारा तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में कुशल काउसंलर्स द्वारा तनाव प्रबंधन, समय प्रबंधन, व्यवहार परिवर्तन, संचार, समूह गतिविधि प्रबंधन, नेतृत्व विकास, रिकॉर्ड प्रबंधन और फाइल कोडिंग, एक्सेल में डेटा विश्लेषण और प्रारूप डिजाइनिंग, सोशल मीडिया/ट्विटर हैंडलिंग के माध्यम से सूचना प्रवाह, फॉरवर्ड लिंकेज रिहैबिलिटेशन आदि अन्य विषयों का प्रशिक्षण दिया जा रहा हैं।महिला अधिकारिता एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण शिविर का शुभारम्भ परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, डॉ. अखिलेश कुमार मिश्रा, नोडल अधिकारी, राज्य परियोजना निदेशक, महिला अधिकारिता एवं बाल विकास विभाग, संजीव कुमार सिंह, वित्त नियंत्रक, महिला अधिकारिता एवं बाल विकास विभाग, अमित गोस्वामी, प्रबंध निदेशक- विल एंड स्किल क्रिएशन प्राइवेट लिमिटेड और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती(Swami Chidanand Saraswati) जी ने उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में वन स्टाप सेन्टर में सेवायें प्रदान कर रही महिलाओं को सम्बोधित करते हुये कहा कि एक ही छत के नीचे महिलाओं एवं बालिकाओं के साथ हो रही हिंसा के समाधान के साथ, उन पीड़ित महिलाओं को स्नेह और प्रेम के साथ जीवन जीने का मार्ग दिखाना और उनकी समस्याओं का समाधान करना तथा उनमें आत्मविश्वास विकसित करने के लिये अपने आप को समर्पित करना सबसे बड़ी सेवा है।स्वामी जी ने कहा कि मारपीट, घरेलू हिंसा और उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को जीवन की राह दिखाने के लिये धैर्य और साहस की जरूरत है।
वन स्टाप सेंटर की बहिनों को स्वयं की भावनाओं के साथ-साथ दूसरों की भावनाओं का प्रबंधन भी करना पड़ता है। उन्हें दूसरी महिलाओं की मजबूरी, कमजोरी, व्यवहार और भावनाओं को समझकर उनमें जीवन के प्रति जुनून और प्यार उत्पन्न करने के लिये स्वयं को मजबूत करना नितांत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति अपने आप में सब समस्याओं का समाधान है। हम है समाधान इस मंत्र को साथ लेकर जाये। साध्वी भगवती सरस्वती (Sadhvi Bhagwati Saraswati) जी ने वन स्टाप सेन्टर की महिलाओं को तनाव प्रबंधन के विषय में सम्बोधित किया। बताया कि कैसे अपने नकारात्मक विचारों को कम कर सकारात्मकता को बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने ध्यान के माध्यम से स्वयं को शांत करने और तनाव को प्रबंधित करने की क्षमता का विकसित करने की विभिन्न विधाओं का अभ्यास करवाया। उन्होंने कहा कि ध्यान के माध्यम से अपनी अंतर्रात्मा की पुकार सुनें और पहले भीतर से खुद को शांत करें। बाहरी परिस्थितियों के कारण अपने भीतर की शांति को खत्म न होने दें।
सदैव ईश्वर का सान्निध्य अनुभव करें, आप कृतज्ञ बनने की कोशिश करें इससे आप खुश रहना सीखेंगे और तनाव भी कम होगा।डॉ. अखिलेश कुमार मिश्रा, नोडल अधिकारी, राज्य परियोजना निदेशक, ने कहा कि परमार्थ निकेतन के दिव्य वातावरण में आकर ही अपने आप तनाव का प्रबंधन हो जाता है। इस दिव्य प्रांगण में तीन दिनों तक रहकर, यहां की दिव्यता को आत्मसात कर इस ऊर्जा को अपने साथ लेकर जायें, यही इस शिविर की सार्थकता है।ज्ञात हो कि वन स्टाप सेंटर महिलाओं के खिलाफ हिंसा की समस्या के समाधान के लिये एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इसे अप्रैल 2015 में लॉन्च किया गया था। यह इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना सहित राष्ट्रीय महिला सशक्तीकरण मिशन के लिये अंब्रेला योजना की एक उप-योजना है।

