e-two wheeler: ई-दोपहिया वाहनों की सब्सिडी को लेकर सरकार और ई-दोपहिया वाहन विनिर्माता आमने सामने हैं। इसका कारण ई-दोपहिया वाहनों की खरीद में मिलने वाली सब्सिडी की देरी है। ई-दोपहिया वाहन निर्माता चाहते हैं कि ई-दोपहिया वाहन खरीदारों को सब्सिडी का पैसा उनके खाते में सीधे भेजा जाए। एक ई-दोपहिया कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि ई-दोपहिया वाहन खरीद सब्सिडी के वितरण में सरकार की ओर से से 6 महीने की देरी होने से कार्यशील पूंजी फंस जाती है।
इलेक्ट्रिक दोपहिया बनाने वाली अधिकांश कंपनियां फेम-3 सब्सिडी योजना के तहत ग्राहकों को सीधा लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए सब्सिडी के हस्तांतरण का अनुरोध सरकार से करने की योजना बना रही हैं। अभी तक फेम योजना के तहत सब्सिडी ईवी निर्माताओं के जरिये मिलती है। बाद में सरकार इसकी प्रतिपूर्ति करती है। जिससे ईवी निर्माताओं की कार्यशील पूंजी फंस जाती है।
सायम के सदस्यों के बीच ऐसे प्रस्ताव पर चर्चा
सूत्रों ने कहा कि वाहन निर्माताओं के संगठन सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सायम) के सदस्यों के बीच ऐसे प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है। लेकिन अभी तक इस पर आमसहमति नहीं बनी है। अगर आम सहमति बनी और सरकार ने ईवी निर्माताओं की बात मानी तो ई-दोपहिया वाहनों की खरीदारी पर ग्राहक के खाते में सब्सिडी का रुपया सीधा डाला जाएगा।
हालांकि प्रस्ताव को चार से पांच ई-दोपहिया निर्माताओं ने समर्थन दिया है। जिसमें वे भी हैं जो सायम के सदस्य नहीं हैं। लेकिन बंद किए जाने से पहले तक सोसायटी ऑफ मैन्युफैक्चरर्स ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल का ही भाग थे। इन कंपनियों का कहना है कि सब्सिडी के सीधे हस्तांतरण से वाहनों की कीमतें बढ़ेंगी और शुरुआती दौर में बिक्री घटेगी। लेकिन सरकार से प्रतिपूर्ति में होने वाली देरी के कारण कार्यशील पूंजी फंसने से होने वाली क्षति से यह अधिक बेहतर होगा।
सब्सिडी के वितरण में सरकार की तरफ से 6 महीने की देरी
एक ई-दोपहिया कंपनी के अधिकारी का कहना है कि सब्सिडी के वितरण में सरकार की तरफ से 6 महीने की देरी (इन कंपनियों को हाल में मार्च की सब्सिडी मिली है) से कार्यशील पूंजी फंसी रहती है। यहां तक कि कार्यशील पूंजी के लिए कर्ज देने वाले बैंक पूरे महीने की सब्सिडी पर विचार नहीं करते हैं। जिससे ई-दोपहिया वाहन विनिर्माताओं को और परेशानी होती है।
ई-दोपहिया कंपनियों ने कहा कि दोपहिया के लिए सब्सिडी घटाकर 22,500 करोड़ रुपए (3 केवीएच बैटरी के लिए) कर दी है। जो पहले 55-60,000 रुपए थी। फेम-3 के तहत यह और कम हो सकती है। ऐसे में सरकार की ओर से ग्राहकों को सब्सिडी के सीधे हस्तांतरण का मतलब बनता है।
बिक्री ने जोर पकड़ा
उनका कहना है कि सरकार की ओर से सब्सिडी में कटौती के साथ कंपनियों को री-इंजीनियरिंग के जरिए लागत घटाने पर काम करना है। इससे कीमत बढ़ानी पड़ रही है। अधिकांश फर्मों का कहना है कि इस साल जून 2023 में सब्सिडी में भारी कटौती के कारण दो महीने बिक्री प्रभावित रही है।
अब बिक्री ने जोर पकड़ा है और त्योहारी सीजन के आसपास यह सामान्य होने की उम्मीद है। इस कारण से ईवी की मांग कम नहीं हुई है। ई-दोपहिया कंपनियों ने स्वीकार किया कि भविष्य की सब्सिडी पर आमराय बनाना ठीक नहीं है। क्योंकि उसे उद्योग के हर सेगमेंट ई-दोपहिया, तिपहिया, यात्री कार, इलेक्ट्रिक वाणिज्यिक वाहन और यहां तक कि बसों के लिए कटौती करनी होगी।

