कल मंगलवार को है चैत्र पूर्णिमा का शाही स्नान
घाटों से लेकर बाजारों तक में नहीं दिख रहे यात्री
हरिद्वार। कोरोना के कोप ने इस बार महाकुुंभ को भी अपने प्रकोप से अछूता नहीं रहने दिया। महाकुुंभ के शाही और पर्व स्नान तमाम बंदिशों के बीच संपन्न हुए। अब कल यानि मंगलवार को होने वाले चैत्र पूर्णिमा का शाही स्नान जो महाकुुंभ का अंतिम स्नान भी है, पर भी कोरोना का खौफ तारी है। हालात यह है कि सोमवार देर शाम तक हरिद्वार में गंगा के घाट से लेकर प्रमुख बाजारों तक में सन्नाटा छाया हुआ है। वहीं कल संतों के शाही स्नान पर भी कोरोना की बंदिशें लागू की गयीं हैं। हालांकि इनका पालन कितना हो पाता है यह देखने वाली बात होगी।
मंगलवार को चैत्र पूर्णिमा का शाही स्नान जो महाकुुंभ का अंतिम स्नान भी है को लेकर मेला पुलिस- प्रशासन पूरी तरह तैयार है। लेकिन इस महत्वपूर्ण शाही स्नान पूर्व संध्या पर हरिद्वार में हरकी पैड़ी समेत पूरी शहर में सन्नाटा दिखाई दे रहा है। हाईवे से लेकर पार्किंग तक खाली दिखाई दे रही हैं। कोरोना के खौफ और नियमों की बंदिशों के चलते रामनवमी के स्नान पर भी श्रद्धालुओं ने हरिद्वार आने से परहेज किया था। बताया गया कि 2010 के कुंभ में 10 लाख श्रद्धालुओं ने चैत्र पूर्णिमा में स्नान किया था लेकिन इस साल यह संख्या हजारों में सीमित रहती दिख रही है।
चैत्र पूर्णिमा के अंतिम शाही स्नान पर पूर्व में जारी स्नान क्रम ही अखाड़ों को मेला पुलिस की ओर से दिया गया है। हालांकि प्रधानमंत्री की प्रतीकात्मक स्नान की अपील के बाद मंगलवार को होने वाले शाही स्नान में संतों की संख्या कम नजर आने की उम्मीद जताई जा रही है। निरंजनी अखाड़ा सबसे पहले शाही स्नान करेगा। संन्यासी अखाड़े प्रतीकात्मक स्नान करेंगे। जबकि बैरागी अखाड़ों के संतों की संख्या सबसे अधिक रहेगी और उनकों 150 वाहनों की अनुमति दी गई है। दोपहर तक शाही अखाड़ों के शाही स्नान करने के बाद आम श्रद्धालुाओं को स्नान की अनुमति दी जायेगी। पुलिस-प्रशासन का लक्ष्य है कि शाम से पहले शाही स्नान को संपन्न करा लिया जाये।

