- कहा, या तो ‘भ्रष्ट’ अधिकारियों को चुनें या पीपीसीसी प्रमुख को
चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेेेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा वापस लेने वाले नवजोत सिंह सिद्धू के तीेखे तेवर कम नहीं हुए हैं। चन्नी सरकार पर शुरू से हमलवार रहे सिद्धू ने कहा कि भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई के लिए चन्नी सरकार में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि न्याय अंधा है लेकिन पंजाब के लोग नहीं। चन्नी सरकार का नाम लिये बगैर सिद्धू ने कहा, यह वह तय करें की वो ‘भ्रष्ट’ अधिकारियों को चुनेंगे या पीपीसीसी प्रमुख को?
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विधानसभा सत्र के बाद पत्रकारों से वार्ता करते हुए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी को मिली जमानत का मुद्दा उठाते हुए चन्नी सरकार पर हमला बोला। सिद्धू ने कहा कि कोटकपूरा कांड में तीसरी एसआईटी का गठन हुए 6 महीने गुजर जाने के बाद भी कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की गई। लेकिन इस मामले में मुख्य आरोपी पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी को जमानत मिल गई। सिद्धू ने कहा, यह व्यक्तिगत नहीं बल्कि नैतिक अधिकार का सवाल है, मैं इस मामले में पंजाब के साथ खड़ा हूं।
डीजीपी और एजी की नियुक्ति से खफा नवजोत ने चन्नी सरकार की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह उनको तया करना है कि वे ‘भ्रष्ट’ अधिकारियों को चुनें या पीपीसीसी प्रमुख को। सिद्धू ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को गद्दी से उतारने के बाद भी उन्होंने अपना रुख नहीं बदला है और वह अपने सिद्धांतों पर कायम हैं।
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सिद्धू पर सरकार और एजी कार्यालय के कामकाज में हस्तक्षेप करने और गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता एपीएस देओल पर पलटवार करते हुए सिद्धू ने 12 ट्वीट्स किए थे। सिद्धू ने ट्वीट में कहा था कि न्याय अंधा है, लेकिन पंजाब के लोग नहीं हैं। बेअदबी के मामलों में न्याय दिलाने का वादा कर हमारी कांग्रेस सत्ता में आई थी। इस मामले में आप (देओल) मुख्य साजिशकर्ताओं/अभियुक्तों की ओर से उच्च न्यायालय में पेश हुए और हमारी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे।

