श्रीराम मंदिर नहीं विहिप कार्यालय का हो रहा निर्माण

उत्तर प्रदेशश्रीराम मंदिर नहीं विहिप कार्यालय का हो रहा निर्माण

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श्रीराम मंदिर नहीं विहिप कार्यालय का हो रहा निर्माण

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने ट्रस्ट के गठन पर भी उठाया सवाल
कहा, लोकतंत्र में भी राजा का निर्णय लोक को मानना पड़ रहा है

प्रयागराज। मंदिर वो बनाते हैं जो राम को मानते हैं। उन्हें आराध्य मानते हैं। अयोध्या में बन रहे श्रीराम मंदिर को लेकर द्वारकाशारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि वहां आने वाले दिनों में विश्व हिन्दू परिषद का कार्यालय बनेगा। वहीं शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो प्राण प्रतिष्ठा कर सके।

माघ मेले में मौनी अमावस्या स्नान करने के लिये शनिवार शाम प्रयागराज पहुंचे द्वारकाशारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने मनकामेश्वर मंदिर में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिये हमने जो ट्रस्ट बनाई थी उसमें शंकराचार्य के अलावा रामानांदाचार्या व अखाड़ों के सदस्य थे। लेकिन वर्तमान ट्रस्ट में ऐसे लोगों को रखा गया है, वो प्राण प्रतिष्ठा कराने में सक्षम नहीं हैं। वहां आराधना स्थल बनाना ही हमारा लक्ष्य था न कि वहां पर आंदोलन की बातों का वर्णन करना। मंदिर निर्माण के लिये धन संग्रह पर सवाल उठाते हुए शंकराचार्या ने कहा कि ये लोग पैसे का हिसाब नहीं देते हैं। सोने की ईंट का जो पैसा लिया गया था उसका हिसाब कहां पर है।

कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन को लेकर शंकराचार्य ने सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि लोकतंत्र में लोक के निर्णय को राजा सुनता है। आज राजा का निर्णय लोक को मानना पड़ रहा है। नोटबंदी, किसान बिल लाकर सरकार केवल एक पक्षीय निर्णय दे रही है। किसानों के पानी को रोकने वाली यह कैसी सरकार है। शंकाराचार्य ने कहा कि सरकार को किसानों से वार्ता कर समस्या का हल निकालना चाहिये। शंकराचार्य ने गंगा के जल को शु़़द्ध करने के लिये सरकार द्वार उचित प्रयास न किये जाने की बात भी कही। उन्होंने माघ मेेले में तमाम शंकराचार्य के आने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आदि शंकराचार्य के कुछ नियम हैं और पीठ हैं। उस पर असीन व्यक्ति ही शंकराचार्य हो।

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