इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 7 अक्टूबर से 14 अक्टूबर के बीच में पूरे देश भर में धूमधाम से मनाया जाएगा । नवरात्रि के पावन दिनों में, देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है जिससे व्यक्ति के मनचाहे इछाओ की पूर्ति होती है। नवरात्रि का पहला दिन घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा के शुरू होता है और नवरात्री के दूसरे दिन माँ दुर्गा के दूसरे रूप देवी ब्रह्मचारिणी को पूजा जाता है। नवरात्री का दूसरा दिन माँ ब्रह्मचारिणी को समर्पित है।
ब्रह्मचारिणी ज्ञान से भरी एक युवती के रूप में पूजी जाती हैं। उनके दो हाथों में एक माला और एक में कमंडल है। वह भक्तों को शाश्वत ज्ञान और आनंद का आशीर्वाद देती है। ब्रह्मचारिणी शब्द का अर्थ है अविवाहित और युवा। ब्रह्मचारिणी का सौम्य और शांतिपूर्ण रूप मन में शांति और चैन लाता है और लोगों में आत्मविश्वास के स्तर को बढ़ाता है।
देवी दुर्गा का यह रूप देवी पार्वती द्वारा की गई घोर तपस्या का प्रतीक है और उनके अविवाहित रूप को देवी ब्रह्मचारिणी के रूप में पूजा जाता है। मां ब्रह्मचारिणी को नंगे पैरों पर चलने, सफेद वस्त्र पहने, और अपने दाहिने हाथ में जप माला (एक रुद्राक्ष माला) और बाएं में कमंडल के रूप में चित्रित किया गया है। रुद्राक्ष माला उनके वन जीवन के दौरान शिव के लिए उनकी तपस्या का प्रतिनिधित्व करती है और कमंडल या पानी का बर्तन उनके हाथो में इस बात का प्रतीक है कि उन्होंने अपने तपस्या के अंतिम चरणों में केवल जल का सहारा लिया।
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मां ब्रह्मचारिणी भाग्य के प्रदाता भगवान मंगल को पूर्ण रूप से नियंत्रित करती हैं और इसके साथ साथ साधना में स्वाधिष्ठान चक्र का भी प्रतिनिधित्व करती हैं। मां ब्रह्मचारिणी की सच्चे मन से पूजा करने से त्याग, वैराग्य, तप, और संयम जैसे गुणों का व्यक्ति में पूर्ण रूप से सही होता है और व्यक्ति अपने नैतिक आचरण को भी सुधार सकता है।
यह कहा जाता है कि हजारों वर्षों की घोर तपस्या के बाद देवी पार्वती ने भगवान् शिव को पाया। उन्होंने तपस्या के दौरान केवल बिल्व पत्र खाया और अंत में आहार को त्यागकर केवल पानी का सहारा लिया। भगवान ब्रह्मा से आशीर्वाद ग्रहण करने के पश्चात, ब्रह्मचारिणी का भगवान शिव से विवाह हुआ और उनकी तपस्या पूर्ण हुई।
देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व
देवी ब्रह्मचारिणी अपनी शुद्ध और ईमानदार भक्ति और दृढ़ संकल्प के लिए जानी जाती हैं। ब्रह्मचारिणी की कहानी बताती है कि उनकी पूजा करने से भक्त अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।
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माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
भगवान शिव के साथ मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। कलश में रखकर उसे फूल, चावल और चंदन चढ़ाएं। दूध, दही और शहद से देवी का अभिषेक करे। आरती और मंत्र का जाप पूर्ण श्रद्धा से करे और उन्हें प्रसाद का भोग लगाए। ऊँ ब्रां ब्रीं ब्रूं ब्रह्मचारिण्यै नम:. मंत्र का उच्चारण कर माँ ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करे।

