अमित बिश्नोई
एक बल्लेबाज़ जो अपनी पिछली 9 टेस्ट पारियों में सिर्फ 127 रन बनाये और फिर भी टीम में लगातार शामिल रहे, कोच और कप्तान का उसके ऊपर लगातार भरोसा बरक़रार रहे, दोनों उसकी क्षमताओं का मीडिया के सामने बखान करते रहें, ऐसा सिर्फ के एल राहुल के साथ हो सकता है. इन 9 पारियों में कोच और कप्तान के फेवरिट बल्लेबाज़ का सर्वोत्तम स्कोर 23 रन है. सारी आलोचनाओं को दरकिनार कर राहुल को जिस तरह मौके दिए जा रहें उससे तो ऐसा लग रहा है जैसे वो सांप सीढ़ी वाला वो गेम खेल रहे हैं जिसमें से कोच और कप्तान ने उनके लिए बोर्ड से साँपों का हटा दिया है और सिर्फ सीढ़ियां रह गयी है जिस पर वो चढ़ रहे हैं.
क्या सुपर फॉर्म में चल रहे हैं KLR
ऐसा यकीन और ऐसा भरोसा बहुत कम खिलाड़ी ही हासिल कर पाते हैं वो भी उन देशों में जहाँ पर उनके पास उस खिलाड़ी के ज़्यादा विकल्प नहीं होते हैं लेकिन जहाँ तक भारत की बात है तो यहाँ पर टैलेंट की भरमार है जो अपनी बारी आने की बाट जोह रहा है, टीम इंडिया का दरवाज़ा खटखटा रहा लेकिन किसी खिलाडी के साथ ऐसा अनुराग कम से कम मुझे तो याद नहीं। इतनी नाकामी के बाद प्रेस कान्फेरेन्स में आकर कोच राहुल द्रविड़ और कप्तान रोहित शर्मा जिस तरह राहुल की प्रशंसा में कसीदे पढ़ते हैं ऐसा लगता है जैसे वो अपने सुपर फॉर्म में चल रहे हैं. क्या श्रेयस अय्यर को इतनी नाकामी दिखाने के बाद भी मौका मिलेगा, क्या शिखर धवन को इतना मौका दिया गया.
कुंठित हो रहे हैं बाहर बैठे बल्लेबाज़
हो सकता है कि के एल राहुल अगले टेस्ट में कोई बड़ी पारी खेल दें तो क्या वो अपनी पिछली इतनी लम्बी नाकामी को धो डालेंगे, क्या कोई एक अच्छी पारी खेलने के बाद उन्हें अगली 9-10 पारियों में नाकाम होने का लाइसेंस मिल जायेगा। सूर्यकुमार को एक ही टेस्ट के बाद क्यों हटा दिया गया, शुभमान गिल को अगर मौका नहीं देना है तो स्क्वाड में शामिल ही क्यों किया। एक इन्फॉर्म बल्लेबाज़ बाहर बैठा कुंठित हो रहा है कि सामने वाला लगातार नाकाम होने के बावजूद मौके पर मौके पाए जा रहा है, सैकड़े लगाना वाला पानी पिला रहा है.
सिर से ऊपर जा रहा है पानी
वैसे पानी सिर से ऊपर जा रहा है, चीज़ें अब फिसल रही हैं, कोच और कप्तान भी अब बहुत दिनों तक राहुल के रक्षा नहीं कर पाएंगे। यह अच्छा हो रहा कि टीम इंडिया बिना राहुल के योगदान के लगातार कामयाबियां हासिल कर रही है. कामयाबी बहुत से ऐब को ढक लेती है लेकिन इसकी भी एक सीमा होती है. अभी फिलहाल नाम के आगे से उपकप्तान हटाया गया है, आगे नाम भी हट सकता है. वैसे अगर देखा जाय तो नाम के आगे से उपकप्तान का हटना भी राहुल को टीम रखने के लिए ही किया गया मालूम पड़ता है क्योंकि बड़ी बातें हो रही थी कि टीम का उपकप्तान इतनी बुरी तरह फ्लॉप होने के बावजूद टीम में बना हुआ है तो सेलेक्टर्स ने सोचा कि फिलहाल टीम से उपकप्तान पद को ही हटा देते हैं, रोहित शर्मा को जिससे उपकप्तानी करानी होगी करवाएंगे। न रहेगा पद और न होगी बहस. फिलहाल तो ऐसा लगता है जैसे बोर्ड और टीम मैनेजमेंट ने के एल राहुल सातों खून माफ़ कर दिए हैं।

