ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में आज उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हुई, शीर्ष अदालत ने सुनवाई के बाद वाराणसी के DM को निर्देश दिया कि पाए गए शिवलिंग की सुरक्षा की जाय मगर नमाज़ियों की संख्या पर कोई पाबन्दी न लगाईं जाय और न उन्हें नमाज़ अदा करने में बाधा आये.
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अंजुमन इंतेज़ामिया मस्जिद बनारस की और से दायर याचिका पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने सुनवाई की, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वाराणसी अदालत के विवादित स्थल जहाँ शिवलिंग मिलने की बात कही जा रही है उसे सील करने की जगह प्रोटेक्शन तक सीमित रखा जाय. ध्यान रहे कि सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश पर रोक नहीं लगाई। इस मामले में हिन्दू पक्ष को नोटिस जारी किया गया है और 19 मई तक आपत्ति मांगी है.
शिवलिंग पर सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जेनरल तुषार मेहता से पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी इसके बारे में मुझे पूरी जानकार नहीं है, इसके लिए मुझे एक दिन का समय चाहिए। वहीँ मुस्लिम पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए हुज़ेफा अहमदी ने वाराणसी कोर्ट के आदेश को चैलेन्ज करते हुए कहा कि इससे मस्जिद का धार्मिक कैरेक्टर बदल जाता है जो प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट की खुली हुई खिलाफवर्ज़ी है.
मुस्लिम पक्ष के वकीन ने कहा 16 मई को वाराणसी कोर्ट ने हिन्दू पक्ष की ओर से दाखिल अर्ज़ी पर तरित कार्रवाई करते हुए आदेश पारित किया और वह भी मुस्लिम पक्ष को बिना कोई जानकारी दिए हुए, क्या इस कार्यवाही पर निष्पक्षता की कमी नहीं दिखती? इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम निचली अदालत के आदेश के कुछ हिस्से पर पर रोक लगा देंगे लेकिन अगर कोई शिवलिंग मिला है तो उसका संरक्षण भी ज़रूरी इसके साथ ही मुसलमानों नमाज़ पढ़ने का अधिकार भी है.
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वुजूख़ाने के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि इससे उस शिवलिंग को नुक्सान पहुँचने की आशंका है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष से इस बात की गारंटी लेंगे। अदालत ने कहा कि पूरे वुजूख़ाने को सील करने की जगह सिर्फ इसका प्रोटेक्शन कीजिये।

