- राम-सीता और लक्ष्मण ने भी किया था यहाँ वास
- प्राकृतिक सौंदर्य के बीच भरपूर एडवेंचर और शांति का मिलता है अनुभव
खूबसूरत वादियां और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच उत्तराखंड के नैनीताल से 30 किलोमीटर आगे स्थित सातताल बेहद ही मनमोहक जगह है। यहां आकर लोग प्राकृतिक नजारों के साथ ही कई एडवेंचर्स का भी मजा लेते हैं। यह जगह अपने आप में बेहद अनूठी और खूबसूरत है। कहा जाता है कि इस जगह पर एक साथ सात झील हैं। इस जगह की तुलना इंग्लैंड के वेस्टमोरलैंड के साथ की जाती है।
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आपस में जुड़ी हैं चार झीलें
बांज के पेड़ों से चारों ओर से घिरी हुई सातताल की 4 झीलें आपस में जुड़ी हुई है। जानकारों के मुताबिक चारों झीलें आपस में मिली हुई है लेकिन इन चारों के कुंड अलग-अलग हैं। 60 फीट पानी कम होने पर यह चारों कुंड अलग अलग दिखाई देने लगते हैं। इन झीलों में 3 झीलें राम, लक्ष्मण, सीता के नाम से है। जबकि सबसे पहली झील गरुड़ झील है। इसके बाद यहां नलदमयंती ताल, हनुमान ताल व सूखा ताल हैं। चारों और से पेड़ों से घिरी होने की वजह से यहाँ पानी का रंग हरा दिखाई देता है।
अंग्रेज उगाते थे चाय
सात ताल हल्द्वानी और नैनीताल में पानी का भी मुख्य स्रोत हैं। ब्रिटिश काल में यहाँ चाय के बागान थे। यहाँ एक चर्च भी स्थित है। इन झीलों के प्राकृतिक सौंदर्य और अनुकूल मौसम की वजह से यहाँ हर साल पक्षियों की सैकड़ों प्रजातियां आती हैं। जबकि यहाँ 500 से ज्यादा तितलियों की प्रजातियां भी पाई जाती है। यहाँ ब्रिटिश काल में बनवाया गया तितलियों का म्यूजियम भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र है। जबकि बर्ड वाचिंग और बोटिंग का अविस्मरणीय लुत्फ़ भी यहाँ सैलानी उठाते हैं |
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सतयुग और द्वापर युग से जुड़ा है इतिहास
प्राकृतिक सुंदरता और सैलानियों के आकर्षण के केंद्र के अलावा सात ताल का इतिहास सतयुग और द्वापर युग से भी जुड़ा हुआ है। इसको लेकर यहां कई कहानियां प्रचलित हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक माना जाता है कि यहां भगवान श्री राम लक्ष्मण और सीता जी ने वास किया था। जिसकी वजह से यहाँ तीन तालों का नाम राम ताल, लक्ष्मण ताल और सीता ताल है। अन्य कथाओं के अनुसार द्वापर युग में इसी जगह पर पांडव भी रुके थे। पांडु पुत्र भीम की पत्नी हिडिंबा भी यहां आई थी। जिस पर्वत पर वह रुकी थी उसका नाम हडिंबा पर्वत है। राजा नल और दमयंती भी यहाँ वास करते थे। उनके नाम पर ही यहां नल दमयंती ताल जाना जाता है।

