Muslims Do Bhandara On Janmashtami: मथुरा। ज्ञानवापी का मामला इस समय सुर्खियों में है। इसी बीच अब मथुरा की शाही ईदगाह मामले में भी दर्ज की गई याचिका को अदालत ने स्वीकार कर लिया है। हालांकि इस मामले में अगली सुनवाई एक जुलाई को होगी। जन्मभूमि के बगल बनी शाही ईदगाह को हटाने की याचिका स्वीकार ली है। अब मामले की अगली सुनवाई 1 जुलाई को होगी। विवाद को लेकर 20 से ज्यादा याचिकाएं दायर हैं। इसी बीच शाही ईदगाह के सचिव और मुसलिम पक्ष की ओर से वकील तनवीर अहमद कहते हैं कि ज्ञानवापी से लेकर मथुरा तक जितनी भी याचिकाएं दायर की गई हैं। सब सोची समझी रणनीति का हिस्सा है।
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उनका कहना है कि यह 2024 की स्क्रिप्ट लिखी जा रही है। उन्होंने कहा कि मथुरा में सभी धर्म के लोग मिलजुलकर रहते हैं। आज तक यहां पर किसी प्रकार का सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि मंदिर में पूजा होती है घंटे बजते हैं इसी दौरान मस्जिद में नमाज होती है। हिंदू भाई अपनी पूजा करते हैं उनको नमाज पढ़ने में कोई एतराज नहीं होता। अजान के दौरान नमाज होती है और जब घंटे और शंख बजते हैं तो मुसलमानों को आपत्ति नहीं होती। तनवीर का कहना है कि विवाद कुछ नहीं था।
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मथुरा में सभी धर्मों के लोग मिलकर रहते हैं। दोनों के रास्ते अलग हैं और सीमाएं भी अलग ही हैं। तनवीर का कहना है कि कृष्ण की माला और राधा की चुनरी सलमा और रिहाना बनातीं हैं। दोनों जब इस काम को करती हैं तो साफ सफाई का बहुत ध्यान रखती हैं। मथुरा में कृष्ण जन्माष्टमी के दिन मुसलमान भंडारा करते हैं। ये है इस कृष्ण जन्मभूमि की परंपरा। उनका कहना है कि बाहरी लोग याचिकाएं कर रहे हैं। इनमें मथुरा का कोई नहीं है। मैं मथुरा के लोगों को तहेदिल से धन्यवाद कहना चाहूंगा। उन्होंने मामले को भाव नहीं दिया। ये लोग जगह-जगह मुकदमे दायर करते घूम रहे हैं। इन्होंने ही ज्ञानवापी, लखनऊ, कुतुबमीनार पर भी याचिकाएं दायर की हैं।

