अखंड सौभाग्य के लिए जरूरी है करवा चौथ 

रसोई Bytesअखंड सौभाग्य के लिए जरूरी है करवा चौथ 

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अखंड सौभाग्य के लिए जरूरी है करवा चौथ 

न्यूज़ डेस्क। करवा चौथ’ का त्यौहार हिन्दुओं का प्रसिद्ध त्यौहार है। हिन्दू कैलेण्डर के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन को ‘गणेश चतुर्थी’ भी कहते हैं सुहागिन महिलाओं के सभी व्रतों में बेहद खास है । इस दिन महिलाएं दिन भर उपवास रखकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। यही नहीं कुंवारी लड़कियां भी मनवांछित वर के लिए या होने वाले पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।  विधि-विधान से माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने के बाद करवा चौथ की कथा सुनी जाती है।  मान्यता है कि करवा चौथ का व्रत करने से अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है। यह व्रत अच्छे गृहस्थ जीवन के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष करवाचौथ का व्रत 4 नवंबर को है

अखंड सौभाग्य के लिए जरूरी है करवा चौथ 
ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास

पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि महान संत कवि तुलसीदास ने श्रीरामचरित मानस के अयोध्या कांड की इन महत्वपूर्ण पंक्तियों में पति-पत्नी के पावन संबंधों की सार्थक व्याख्या की है। सीता जी वन जा रहे भगवान राम से कहती हैं- माता, पिता, बहन, प्यारा भाई, प्यारा परिवार, मित्रों का समुदाय, सास,ससुर, गुरु, स्वजन, सहायक और सुंदर सुशील और सुख देने वाला पुत्र, हे नाथ! जहां तक स्नेह और नाते हैं, पति के बिना स्त्री को सभी सूर्य से बढ़ कर तपाने वाले हैं। शरीर, धन, घर, पृथ्वी, नगर और राज्य, पति के बिना स्त्री के लिए यह सब शोक का समाज है। करवा चौथ का व्रत गृहस्थ जीवन के लिए इसीलिए अति महत्वपूर्ण हैं। सावित्री ने इस बात की गंभीरता को समझा, तभी तो तप कर पति सत्यवान के लिए यमराज से लंबी आयु का वरदान हासिल किया।

ये व्रत सुहागिन औरतें अपने पति की लंबी आयु की कामना के लिए रखती हैं. वह बताते हैं कि करवा चौथ की पूजा से पहले और बाद में भजन-कीर्तन जरूर करें। इससे वातावरण में सकारात्मकता आती है, और पूजन का पूर्ण फल मिलता है।  कहा जाता है कि इस दिन महिलाओं को सोलह श्रृंगार करके ही पूजा में शामिल होना चाहिए। इनमें मेंहदी, चूड़िया, मांग टीका के अलावा और भी चीजों को सोलह श्रृंगार में शामिल किया है। शास्त्रों के अनुसार यह व्रत कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी के दिन करना चाहिए। पति की दीर्घायु एवं अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन भालचन्द्र गणेश जी की अर्चना की जाती है। ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि भारत देश में वैसे तो चौथ माता के मंदिर कई जगह है। लेकिन सबसे प्राचीन एवं सबसे अधिक ख्याति प्राप्त मंदिर राजस्थान राज्य के सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा गाँव में स्थित है। चौथ माता के नाम पर इस गाँव का नाम बरवाड़ा से चौथ का बरवाड़ा पड़ गया। चौथ माता मंदिर की स्थापना महाराजा भीमसिंह चौहान ने की थी।

लाल रंग के कपड़े पहनें, मिलेगा पति का प्यार

करवाचौथ के दिन व्रत रखने वाली महिलाएं यदि लाल रंग के कपड़े पहनती हैं तो उन्हें जिंदगी भर पति का प्यार मिलेगा। माना जाता है कि लाल रंग गर्मजोशी का  प्रतीक है और मनोबल भी बढ़ाता है। साथ ही लाल रंग प्यार का प्रतीक भी माना जाता है। लाल रंग में महिलाएं अधिक सुंदर और आकर्षित दिखती हैं एवं सबके आकर्षण का केंद्र बिंदू बनती हैं। नीले, भूरे और काले रंग के कपड़े न पहनें, क्योंकि ये अशुभता के प्रतीक हैं।

अखंड सौभाग्य के लिए जरूरी है करवा चौथ 

कैसे मनाते हैं करवा चौथ का त्योहार  

अनीष व्यास ने बताया कि करवा चौथ की तैयारियां कई दिन पहले से शुरू हो जाती हैं. सुहागिन महिलाएं कपड़े, गहने, श्रृगार का सामान और पूजा सामग्री खरीदती हैं. करवा चौथ वाले दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी खाती हैं. इसके बाद सुबह हाथ और पैरों पर मेहंदी लगाई जाती है और पूजा की थालियों को सजाया जाता है. व्रत करने वाली आस-पड़ोस की महिलाएं शाम ढलने से पहले किसी मंदिर, घर या बगीचे में इकट्ठा होती हैं. यहां सभी महिलाएं एक साथ करवा चौथ की पूजा करती हैं. इस दौरान गोबर और पीली मिट्टी से पार्वती जी की प्रतिमा स्थापित की जाती है. आज कल माता गौरी की पहले से तैयार प्रतिमा को भी रख दिया जाता है. विधि-विधान से पूजा करने के बाद सभी महिलाएं किसी बुजुर्ग महिला से करवा चौथ की कथा सुनती हैं. इस दौरान सभी महिलाएं लाल जोड़े में पूरे सोलह श्रृंगार के साथ पूजा करती हैं. चंद्रमा के उदय पर अर्घ्य दिया जाता है और पति की आरती उतारी जाती है. पति के हाथों पानी पीकर महिलाओं के उपवास का समापन हो जाता है।

करवा चौथ की पूजन सामग्री 

करवा चौथ के व्रत से एक-दो दिन पहले ही सारी पूजन सामग्री को इकट्ठा करके घर के मंदिर में रख दें. पूजन सामग्री इस प्रकार है- मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन, पानी का लोटा, गंगाजल, दीपक, रूई, अगरबत्ती, चंदन, कुमकुम, रोली, अक्षत, फूल, कच्चा दूध, दही, देसी घी, शहद, चीनी,  हल्दी, चावल, मिठाई, चीनी का बूरा, मेहंदी, महावर, सिंदूर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, बिछुआ, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, छलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलुआ और दक्षिणा के पैसे।

पूजा विधि

करवा चौथ वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर लें।

अब इस मंत्र का उच्चारण करते हुए व्रत का संकल्प लें- ”मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये”. 

सूर्यादय से पहले सरगी ग्रहण करें और फिर दिन भर निर्जला व्रत रखें। दीवार पर गेरू से फलक बनाएं और भिगे हुए चावलों को पीसकर घोल तैयार कर लें। इस घोल से फलक पर करवा का चित्र बनाएं। वैसे बाजार में आजकर रेडीमेड फोटो भी मिल जाती हैं। इन्हें वर कहा जाता है. चित्रित करने की कला को करवा धरना का जाता है। आठ पूरियों की अठावरी बनाएं. मीठे में हल्वा या खीर बनाएं और पकवान भी तैयार करें। अब पीली मिट्टी और गोबर की मदद से माता पार्वती की प्रतिमा बनाएं. अब इस प्रतिमा को लकड़ी के आसान पर बिठाकर मेहंदी, महावर, सिंदूर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी और बिछुआ अर्पित करें। जल से भर हुआ लोट रखें। करवा में गेहूं और ढक्कन में शक्कर का बूरा भर दें। रोली से करवा पर स्वास्तिक बनाएं। अब गौरी-गणेश और चित्रित करवा की पूजा करें।

पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें- 

”ऊॅ नम: शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥”

करवा पर 13 बिंदी रखें और गेहूं या चावल के 13 दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की कथा कहें या सुनें। कथा सुनने के बाद करवा पर हाथ घुमाकर अपने सभी बड़ों का आशीर्वाद लें और करवा उन्हें दे दें। पानी का लोटा और 13 दाने गेहूं के अलग रख लें।चंद्रमा के निकलने के बाद छलनी की ओट से पति को देखें और चन्द्रमा को अर्घ्य दें। चंद्रमा को अर्घ्य देते वक्त पति की लंबी उम्र और जिंदगी भर आपका साथ बना रहे इसकी कामना करें। अब पति को प्रणाम कर उनसे आशीर्वाद लें और उनके हाथ से जल पीएं. अब पति के साथ बैठकर भोजन करें।

करवा चौथ मुहूर्त

करवा चौथ पूजा मुहूर्त- शाम 5:29 से 6:48 बजे
चंद्रोदय- 8:24 बजे
चतुर्थी तिथि आरंभ- 03:24 (4 नवंबर)
चतुर्थी तिथि समाप्त- 05:14 (5 नवंबर)

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