अखिलेश यादव ने काशी में संकेत दिया कि वे 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसके पीछे उनका तर्क है कि कि वे मुख्यमंत्री तभी बनते हैं, जब चुनाव नहीं लड़ते।दरअसल, उनके पिता मुलायम सिंह यादव भी बिना चुनाव लड़े मुख्यमंत्री बने थे। अखिलेश खुद भी जब मुख्यमंत्री बने थे, तब वह सांसद थे।
हालांकि, कुछ दिन पहले अखिलेश ने मुख्यमंत्री योगी को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। लेकिन, जब योगी ने चुनौती स्वीकार की, तो अखिलेश ने कहा कि अयोध्या में सपा नेता पवन पांडेय ही उन्हें हराने के लिए काफी हैं।
अब जानिए उन नेताओं के बारे में, जो बिना विधायकी लड़े सीएम बने
यूपी में बिना विधानसभा चुनाव लड़े मुख्यमंत्री बनने का उदाहरण पहले भी देखने को मिला है।
मुलायम सिंह यादव (2003): मुलायम सिंह यादव जब तीसरी बार मुख्यमंत्री बने थे, उस समय संभल से लोकसभा सांसद थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने गुन्नौर विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
मायावती (1995 और 2007): 1995 में मायावती राज्यसभा सांसद रहते हुए मुख्यमंत्री बनी थीं। 2007 में बसपा को पूर्ण बहुमत मिला, लेकिन मायावती ने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा। मुख्यमंत्री बनने के बाद वे विधान परिषद (MLC) की सदस्य बनीं।
अखिलेश के चुनाव नहीं लड़ने के पीछे क्या रणनीति है?
अखिलेश यादव के इस बयान के पीछे बड़े कारण हैं।
पहला- 2012 में अखिलेश यादव पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। उस समय वे लोकसभा सांसद थे। बाद में वह एमएलसी बने। इसी वजह से माना जा रहा है कि अखिलेश एक बार फिर इसी रणनीति को अपनाना चाहते हैं।
दूसरा कारण- अखिलेश यह संदेश देना चाहते हैं कि सपा में मुख्यमंत्री का चेहरा पहले से तय है। अगर 2027 में सपा की सरकार बनती है, तो अखिलेश ही मुख्यमंत्री होंगे। इससे वे भाजपा पर राजनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
चुनाव नहीं लड़ने के फायदे
1- पूरे प्रदेश पर ध्यान देने का मौका मिलेगा।
2- सभी 403 विधानसभा सीटों पर प्रचार कर सकेंगे।
3- किसी एक सीट पर समय देने की जरूरत नहीं होगी।
4- कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा सकेंगे।
5- PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की रणनीति को मजबूत कर सकेंगे।
चुनाव नहीं लड़ने के नुकसान
1- विरोधी पार्टियां आरोप लगा सकती हैं कि अखिलेश चुनाव लड़ने से डर रहे हैं।
2- जनता के बीच गलत राजनीतिक संदेश जा सकता है।
3 – विपक्ष इसे उनकी कमजोरी बताकर चुनावी मुद्दा बना सकता है।
दरअसल, अखिलेश यादव का 2027 का विधानसभा चुनाव न लड़ना उनकी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वे किसी एक विधानसभा सीट पर उलझने के बजाय पूरे उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का प्रचार करना चाहते हैं।
उनका मुख्य लक्ष्य पार्टी को मजबूत करना, PDA वोट बैंक को साधना, कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाना और भाजपा पर राजनीतिक दबाव बनाना हो सकता है।

