Purnagiri Mandir – शक्तिपीठ में भक्त “झूठे के मंदिर” का करते हैं दर्शन

धर्म Purnagiri Mandir - शक्तिपीठ में भक्त "झूठे के मंदिर" का करते हैं...

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चंपावत- मां भगवती के शक्तिपीठों में से एक मां पूर्णागिरि मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है. इस मंदिर में जहां मां भगवती को शक्ति रूप में आराधना की जाती है तो वही यहां “झूठे का मंदिर” भी यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हमेशा एक आकर्षण का केंद्र रहता है. यह दुनिया का शायद पहला ऐसा शक्तिपीठ होगा जहां ‘झूठे का मंदिर’ प्रचलन में है. यहां आने वाले श्रद्धालु मंदिर से लौटते हुए इस मंदिर के दर्शन भी करते हैं।

उत्तराखंड के चंपावत जिले में टनकपुर से करीब 17 किलोमीटर दूर स्थित है मां पूर्णागिरि का मंदिर. 108 सिद्ध पीठ में से एक माने जाने वाली इस शक्तिपीठ पर माता सती की नाभि गिरी थी. पूर्णागिरी मंदिर को पुण्यगिरी के नाम से भी जाना जाता है. शारदा नदी के तट पर स्थित पूर्णागिरी मंदिर में चैत्र नवरात्रि पर एक बड़े मेले का आयोजन किया जाता है. जिस में शामिल होने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं।

धार्मिक मान्यताएं

समुद्र तल से करीब 3000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पूर्णागिरी मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब राजा दक्ष द्वारा भगवान शिव को महायज्ञ में आमंत्रित नहीं किया गया. तब माता सती ने क्रोध में आकर उस हवन कुंड में अपने आप को स्वाहा कर लिया. जिस पर भगवान भोलेनाथ क्रोधित हो गए और माता सती के शव को लेकर तांडव करने लगे. देवताओं की प्रार्थना के बाद भगवान विष्णु ने माता सती के शरीर के सुदर्शन से कई टुकड़े कर दिए. जहां-जहां शरीर के अंग गिरे वह आज शक्तिपीठ के रूप में स्थापित हैं. कहा जाता है कि पूर्णागिरी मंदिर में माता सती का नाभि वाला भाग गिरा था।

“झूठे के मंदिर”में होती है पूजा

पूर्णागिरी मंदिर के पास ही “झूठे का मंदिर” स्थित शायद विश्व का शक्तिपीठ के समीप पहला ऐसा मंदिर होगा जहां पर झूठों की पूजा की जाती है, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि एक बार निसंतान सेठ को माँ ने सपने में आकर दर्शन करने को कहा, सेठ ने मां पूर्णागिरि का आदेश मानते हुए दर्शन किए. उसके बाद उसे संतान प्राप्ति हुई. कहा जाता है कि मनोकामना पूरी होने से सेठ ने सोने का मंदिर अर्पण करने की घोषणा की थी, मनोकामना पूर्ण होने पर सेठ के मन में लालच जाग गया और उसने सोने की पालीश किया हुआ मंदिर बनाकर भिजवा दिया. कहा जाता है कि जब मजदूर उस मंदिर को लेकर आ रहे थे तब थकान की वजह से उन्होंने उस मंदिर को एक जगह रख दिया और उसके बाद देवी के प्रताप से वह मंदिर अपनी जगह से नहीं हिला. आज उस मंदिर को आज के समय में झूठे का मंदिर कहा जाता है।

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