Inflation: महंगाई से नहीं मिलेगी राहत, वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट ने किया डराने वाला खुलासा

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Inflation : महंगाई से अभी लोगों को राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। ऐसा वित्त मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा है। जिसके मुताबिक आम लोगों को अभी जल्द महंगाई से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। वित्त मंत्रालय ने एनुअल इकोनॉमिक रिव्यू में कहा कि थोक महंगाई के कम आंकड़ों और रिटेल महंगाई के आंकड़ों के बीच अंतर काफी बड़ा है।

अदरक, टमाटर, मिर्च, बैंगन और जीरा जैसे रसोई के सामान की कीमतें इन दिनों आसमान पर हैं। आम लोगों की जेब इन सामानों को खरीदने पर ढीली हो रही है। वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट अब जो सामने आई है वो और ज्यादा डराने वाली है। वित्त मंत्रालय ने रिपोर्ट में साफ कहा है कि आने वाले दिनों में आम लोगों को महंगाई से राहत नहीं मिलेगी। रोजमर्रा के खाने के सामान की कीमतें अभी और बढ़ेगी। वित्त मंत्रालय ने इसका जिम्मेदार हीटवेव और बढ़ती गर्मी के प्रभाव को ठहराया है।

वित्त मंत्रालय ने एनुअल इकोनॉमिक रिव्यू में कहा है कि होल सेल प्राइस इंडेक्स यानी डब्ल्यूपीआई में गिरावट देखने को मिल रही है। जिसका असर रिेटेल इंफ्लेशन पर धीमी गति से हो रहा है। इसके अलावा अल नीनो प्रभाव देखने को मिल रहा है। इसी सब कारणों से कंज्यूमर की स्थिति और खराब होगी। मंत्रालय ने कहा कि लोन डिमांड पर moratorium policy का धीमा प्रभाव Dearness को कम कर सकता है।

रिटेल महंगाई पर थोक का असर धीमा

सालाना आधार पर मई 2023 में खुदरा महंगाई दर घटकर 25 महीने के निचले स्तर 4.25 फीसद पर थी। महंगाई के गिरते आंकड़े देश में मूल्य वृद्धि में कमी की तस्वीर पेश कर सकते हैं। लेकिन थोक और खुदरा आंकड़ों के बीच अंतर बड़ा है। भारत की थोक महंगाई मई 2023 में मुख्य रूप से खनिज तेल, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस और बुनियादी धातुओं की कीमतों में गिरावट के कारण 3.48 प्रतिशत कम हो गई थी। आंकड़ों से पता चलता है कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी देखने को मिली। जिसका असर मसालों पर पड़ा है।

इन वजहों से ग्रोथ पर असर

भारत कृषि प्रधान इकोनॉमी होने के कारण, अल नीनो का प्रभाव बाजारों के लिए चिंता का कारण है। वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा है कि​ भू-पॉलिटिकल इश्यूज और अल नीनो के प्रभाव से वित्तवर्ष 2024 के बढोत्तरी में गिरावट देखने को मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया कि जियो पॉलिटिकल टेंशन, ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम में बढ़ी अस्थिरता, ग्लोबल शेयर बाजारों में करेक्शन, अल नीनो का असर शामिल हैं।

स्टॉक लिमिट का आदेश

अल नीनो के पूर्वानुमान ने नीति निर्माताओं को उडद, तुअर और गेहूं स्टॉक लिमिट करने और 2024 के मध्य तक चीनी निर्यात पर कैप लागू करने के लिए मजबूर किया है। आज गुरुवार को सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत में सामान्य से कम मानसून के कारण गर्मियों में बोए चावल की बुआई में सालाना आधार पर 25 प्रतिशत की गिरावट आई। इससे वस्तुओं की कीमत बढने के आसार हैं।

बढ़ेगी ग्लोबल लेवल पर महंगाई

उत्पादन में नरमी सप्लाई चेन में परेशानी का संकेत है। कम प्रोडक्शन के कारण सरकार और अधिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। जिसकी वजह से एक्सपोर्टर्स को संघर्ष करना पड़ेगा और ग्लोबल लेवल पर दाम बढ़ेंगे। ग्लोबल बिजनेस हाउस सिंगापुर स्थित डीलर के हवाले से कहा कि सप्लाई की कंडीशन खराब है। भारतीय निर्यात में ग्लोबल लेवल पर महंगाई में तेजी आ सकती है। इंडियन इकोनॉमी अभी रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण सप्लाई परेशानी के परिणामों से उबर रही है।

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