NITI Aayog meeting: मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली पर लाए गए केंद्र के अध्यादेश को कानून बनने से रोकने के लिए देश की यात्रा पर हैं। अब तक केजरीवाल बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, महाराष्ट्र में उद्वव ठाकरे, एनसीपी नेता शरद पवार, बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और भारत राष्ट्र समिति नेता केसीआर से मुलाकात कर चुके हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई को नई संसद का उद्घाटन करेंगे। हालांकि प्रधानमंत्री के इस उद्धाटन कार्यक्रम का विपक्षी दलों ने बहिष्कार करने की ठानी है। विपक्ष इसके माध्यम से अपनी राजनीति साधने की तैयारी में है। लेकिन नई संसद के उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले यानी आज 27 मई को नीति आयोग की बैठक का बहिष्कार कर मुख्यमंत्रियों ने केंद्र सरकार को यह एहसास करा दिया कि उसकी आगे की राह इतनी आसान नहीं होने वाली। राज्यसभा का गणित देख दिल्ली सेवाओं पर लाए अध्यादेश को कानून बनाने में सरकार को चुनौती का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में अगर नई संसद में पहला शक्ति परीक्षण हुआ तो इस परीक्षा में सरकार हार सकती है?
इन मुख्यमंत्रियों ने बैठक का किया बहिष्कार
आम आदमी पार्टी ने सबसे पहले नीति आयोग की बैठक का बहिष्कार किया। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर कहा, ‘सरकार लोकतंत्र की भावना के अनुसार नहीं चल रही है, लिहाजा नीति आयोग की बैठक में उनका शामिल होने का कोई इरादा नहीं है। उनके साथ पंजाब के आप पार्टी के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नीति आयोग की बैठक में भाग लेने से मना कर दिया।
इन दो मुख्यमंत्रियेां के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तेलंगाना मुख्यमंत्री केसीआर, तमिलनाडु मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, केरल मुख्यमंत्री पी. विजयन और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नीति आयोग की बैठक में भाग होने से साफ मना कर दिया। वहीं दूसरी ओर राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी नीति आयोग की बैठक में नहीं पहुंचे।

