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Milk Price: इस गर्मी बढ़े दाम पर दूध खरीदने को रहिए तैयार, एक साल में बढ़ गए 20 प्रतिशत दाम

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नई दिल्ली। आसमान छूती महंगाई के बीच एक बार फिर से गर्मी में दूध के बढ़े दामों के लिए तैयार रहिए। माना जा रहा है कि मई में दूध के दाम फिर से बढ़ेगे। दूध की बढ़ती कीमतों का असर आम लोगों पर दिखाई दे रहा है। दूध की कीमतें पिछले एक साल में 20 प्रतिशत बढ़ी हैं। जो एक दशक में सबसे अधिक हैं। जानकारों का मानना है कि मई 2023 में दूध के दाम और बढ़ सकते हैं।

बढ़ती महंगाई के बीच दुधारू पशुओं के चारे की कीमत में तेजी से वृद्धि हो रही है। इसके अलावा महामारी के कारण दुधारू पशुओं की कमी और उत्पादकता में मंदी के चलते देश के लगभग सभी इलाकों में दूध के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं और इसके चलते भोजन में अटूट हिस्सा रहा दूध आम लोगों को अब मुश्किल से उपलब्ध हो रहा है।

दूध के दाम में बेतहाशा वृद्धि

पिछले एक साल के भीतर अमूल ने दूध की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी की है। गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ का कहना है कि किसानों को उनकी उत्पादन लागत से अधिक कीमत चुकाने के लिए खुदरा कीमतों में कई बार वृद्धि की गई।
फरवरी में अमूल ने दूध की कीमतों में 3 रुपये की वृद्धि की, जो एक वर्ष में की जाने वाली पांचवीं वृद्धि थी। एक लीटर फुल क्रीम दूध अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 66 रुपये में बिकता है, जबकि टोन्ड मिल्क की कीमत 54 रुपये है। दूध में खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी में 9.65% बढ़ी, जो पिछले महीने 8.79% थी। ये अनाज के बाद किसी चीज में होने वाली सबसे बड़ी वृद्धि है।

भारत दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है। 2021-22 में भारत में 221 मिलियन टन दूध उत्पादन के साथ भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक रहा है। इसके बाद भी दूध की कीमत में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। आखिर इसका कारण क्या है? बताया जाता है कि रूस और यूक्रेन युद्धके कारण वैश्विक अनाज की कमी के कारण भारत से टूटे हुए चावल और गेहूं के अवशेषों का अधिक निर्यात हुआ। जिससे चारे की कमी हो गई। इससे मक्के की कीमतों में तेजी आई है। कुल मिलाकर, 2021 से चारे की कीमतें लगभग 21 प्रतिशत बढ़ी हैं।

पशुओं में फैली संक्रमण की भूमिका

देश के दुघारू पशुओं में विषाणु संक्रमण से होने वाले गांठदार त्वचा रोग ने पिछले साल महामारी का रूप धारण कर लिया था। अनुमान है कि कई राज्यों में इसके चलते लाखों दुघारू पशुओं की मौत हुई थी। महामारी के बाद वाणिज्यिक खरीदारों की बढ़ती मांग के बीच जल्द ही मांग-आपूर्ति बेमेल होने लगी।

होटल, रेस्तरां, कैंटीन आदि से बढ़ रही मांग के बीच उद्योग के लिए आपूर्ति बनाए रखना मुमकिन नहीं। कोरोना महामारी फैलने के साथ किसानों ने पशुओं के झुंड का आकार सीमित कर दिया। यूपी, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में पशु बाजारों को बंद कर दिया गया। क्योंकि महामारी को रोकने के लिए प्रतिबंध लगाए गए थे। इन सबके चलते दूध के दाम बढ़ाना कंपनियों की मजबूरी बन गई।

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